आगरा नगर निगम में 100 रुपये के अनुमानित काम का टेंडर ठेकेदार 58 रुपये तक में ले रहे हैं, लेकिन थर्ड पार्टी जांच में निर्माण की गुणवत्ता पर कोई खामी नहीं मिल रही। पार्षदों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि मौके पर सड़क, फुटपाथ और डिवाइडर खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
आगरा नगर निगम में ठेकेदार 100 रुपये का काम केवल 58 रुपये में कर रहे हैं। फिर भी थर्ड पार्टी जांच में गुणवत्ता में कोई खामी नहीं मिल रही है। पार्षदों ने इस पर हैरत जताते हुए थर्ड पार्टी जांच करने वाली कंपनी पर ही सवाल उठाए हैं।
विज्ञापन
पार्षदों का कहना है कि 42 फीसदी तक नीचे उठाए जा रहे टेंडरों में विकास कार्यों की गुणवत्ता कैसे ठीक रखी जा सकती है। ये तब हो रहा है जब सड़कें-फुटपाथ बनने के बाद तीन माह में ही उखड़ रहे हैं। लोहामंडी से बोदला के बीच डिवाइडर, सड़क, साइड पटरी, फुटपाथ और पुलिया का निर्माण कराया गया।
साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत के इस काम में सड़क कई जगह धंस गई। फुटपाथ ऊबड़-खाबड़ बनाया गया। कर्व स्टोन टूटे हुए हैं। यह सभी काम नगर निगम की थर्ड पार्टी बीएलजी कंसल्टेंट की जांच में बेहतर पाए गए। इसके अलावा 10 लाख से ज्यादा लागत वाले अन्य कार्यों में भी कंपनी को खामी नहीं मिली।
तय कीमत से नीचे लिए काम
शांति सिनेमा के पास सीसी फर्श के निर्माण का टेंडर 42 फीसदी नीचे लिया गया। ताजगंज जोन में कमला अरुण स्कूल के सामने ताल सैमरी तक सीसी नाला का टेंडर 37 फीसदी नीचे आया। अमरबाग में सीसी नाला निर्माण 38 फीसदी, अतुल फार्म हाउस के पास नाला निर्माण कार्य भी 38 फीसदी नीचे लिया गया।
कंपनी को कहीं नहीं मिली खामी
नगर निगम 40 लाख रुपये से ज्यादा के कामों की थर्ड पार्टी जांच कराता था लेकिन बाद में यह सीमा घटाकर 10 लाख रुपये करा दी गई। अब 10 लाख से ज्यादा लागत के निर्माण कार्य की जांच बीएलजी कंसल्टेंट की ओर से की जा रही है। हैरानी वाली बात ये है कि कंपनी ने एक साल में एक भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब नहीं पाई है। यह तब है जब ठेकेदार टेंडर 25 से 45 फीसदी तक कम दामों पर ले रहे हैं और निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़कों के धंसने, नालों की दीवार गिरने, सीवर लाइन क्षतिग्रस्त होने और फुटपाथ टूटने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पार्षद रवि माथुर ने कहा कि निर्माण कार्यों की लागत बढ़ रही है लेकिन निगम में 10 लाख का काम 5 से 6 लाख रुपये में ठेकेदार कर रहे हैं। थर्ड पार्टी जांच केवल नाम मात्र की है। मिलीभगत करके जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट पर ही साइन किए जा रहे हैं। एक भी मामला थर्ड पार्टी जांच में नहीं पकड़ा गया।
पार्षद बंटी माहौर का कहना है कि सड़क बनते ही तीन से छह महीने में खराब हो रही है। फुटपाथ का लेवल नहीं, डिवाइडर टेढ़े-मेढ़े बन रहे हैं लेकिन थर्ड पार्टी की जांच में कागजों में सब ठीक है। निगम इस मिलीभगत को खत्म कराए।
नगर निगम के मुख्य अभियंता अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि निर्माण कार्य का टेंडर ठेकेदार कितनी कम कीमत पर ले रहा है, इस पर कोई रोक नहीं है। हमने 150 फीसदी परफॉर्मेंस गारंटी लगाई है। पीडब्ल्यूडी के मानकों की सख्ती से जांच कराते हैं। अगर थर्ड पार्टी जांच पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो इसकी भी जांच करा ली जाएगी।