आगरा नगर निगम में महापौर हेमलता दिवाकर और नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच छिड़ा संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार को महापौर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर नगरायुक्त के विरुद्ध सदन में पारित निंदा प्रस्ताव पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की गुहार लगाई है।
महापौर ने सीधा आरोप लगाया कि नगरायुक्त करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और अपनी जवाबदेही से बचने के लिए सदन के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने 23 मार्च की बैठक का जिक्र करते हुए इसे नगर निगम के इतिहास का ''''काला दिवस'''' बताया। महापौर के अनुसार, आगरा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब अधिकारी विहीन सदन संचालित हुआ। बैठक में उपस्थित 81 पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि अधिकारी जानबूझकर जनप्रतिनिधियों का सामना करने से बच रहे हैं।
ऑफलाइन टेंडर से चहेतों को बांटे करोड़ों का काम
महापौर ने पत्र में स्पष्ट किया कि नगरायुक्त ने लोकसभा सत्र और उच्चस्तरीय बैठक का हवाला देकर सदन टालने की कोशिश की, जबकि 21 जुलाई 2023 को इन्हीं नगरायुक्त के कार्यकाल में संसद सत्र के दौरान सदन की बैठक संपन्न हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नगरायुक्त ने नगर निगम अधिनियम की धारा 117-6 (बी) का दुरुपयोग कर चहेते ठेकेदारों को ऑफलाइन टेंडर के जरिए करोड़ों के काम बांटे हैं। शासन में इसकी शिकायत होने के कारण ही वे सदन का एजेंडा जारी करने में टालमटोल कर रहे थे।
50-50 लाख के विकास कार्य रुके, जताई नाराजगी
पत्र में विकास कार्यों की अनदेखी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। महापौर ने कहा कि वार्डों में 50-50 लाख के विकास कार्य और सफाई मित्रों की तैनाती का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद नगरायुक्त ने इस पर अमल नहीं किया। भीम नगरी और डॉ. अंबेडकर जयंती जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों से जुड़े कार्यों को रोकने पर भी पार्षदों ने कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्यमंत्री को भेजे गए निंदा प्रस्ताव पर 72 पार्षदों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।