अंग्रेजों के जमाने की थ्री-नॉट-थ्री राइफल की भले ही पुलिस विभाग से विदाई हो गई हो, लेकिन जेलों की सुरक्षा में अब भी यही काम आ रही है। आगरा जिला और केंद्रीय कारागार में बंदी रक्षक अब भी पुरानी राइफल का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। वॉच टावर से लेकर गेट तक पर संतरी इसी राइफल के साथ ड्यूटी कर रहे हैं।
28 नवंबर 2019 में शासन ने थ्री-नॉट-थ्री राइफल पर पाबंदी लगा दी थी। यह राइफल पुलिस विभाग का 70 साल से हिस्सा बनी हुई थीं। थानों में पुलिसकर्मियों को इंसास और एसएलआर से लैस किया गया है।
पुलिस से थ्री-नॉट-थ्री को जमा करा लिया गया है। अगर, जेलों की सुरक्षा के बात करें तो इनमें अब भी सुरक्षा में लगे बंदीरक्षक थ्री-नॉट-थ्री राइफल से ही ड्यूटी दे रहे हैं। जेलों के लिए अब भी कोई निर्देश नहीं आया है।
वॉच टावर से लेकर गेट तक पर लगती है ड्यूटी
जेलों में वॉच टावर से लेकर संतरी तक की ड्यूटी पर असलाह से लैस बंदी रक्षक लगाए जाते हैं। बंदीरक्षकों को थ्री-नॉट-थ्री ही दी जाती हैं। अन्य प्रमुख हथियार अब तक नहीं मिले हैं। थ्री-नॉट-थ्री को जमा भी नहीं कराया गया है।
पहले विश्व युद्ध में हुआ था इस्तेमाल
पुलिस में 35 साल सर्विस करने वाले रिटायर्ड डिप्टी एसपी एके सिंह बताते हैं कि थ्री-नॉट-थ्री का इस्तेमाल 1914 में पहले विश्व युद्ध के दौरान हुआ था। इसकी मारक क्षमता तकरीबन दो किलोमीटर है। इसे ब्रिटिश आर्मी ने 1880 में इस्तेमाल किया था।
इसके कुछ समय बाद बदलाव कर दिया गया। इन बदलाव के आधार पर ही इन्हें अलग-अलग नंबर दिए गए। 1986 में उत्तर प्रदेश पुलिस को मिलीं। 1993 के बाद नई थ्री नॉट थ्री रायफल नहीं आई।
यह है जेलों की स्थिति
जिला कारागार में तकरीबन 3100 बंदी हैं। इनकी सुरक्षा में 73 बंदीरक्षक तैनात हैं। 15 थ्री-नॉट-थ्री राइफल हैं। इसके अलावा चार 9 एमएम की पिस्टल हैं। गेट पर दो संतरी, एक वाच टावर पर दो बंदीरक्षक और बैरियर पर दो बंदीरक्षक राइफल के साथ रहते हैं।
वहीं केंद्रीय कारागार में तकरीबन दो हजार बंदी हैं। इनमें 82 बंदी कश्मीरी हैं। जेल के गेट पर तीन बंदीरक्षक रहते हैं। इनमें मुख्य संतरी और सहायक संतरी पर थ्री-नॉट-थ्री रहती है। जेल प्रशासन के पास राइफल भी तकरीबन 20 हैं। हालांकि केंद्रीय कारागार में कश्मीरी बंदियों के चलते सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यहां पर पीएसी के अलावा पुलिस लाइन से फोर्स लगाया गया है।
नहीं मिले नए हथियार
डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने बताया कि जेलों की सुरक्षा में बंदीरक्षकों के पास थ्री-नॉट-थ्री राइफल हैं। अभी नए असलाह नहीं मिले हैं। जेल के गेट पर राइफल के साथ बंदीरक्षकों को लगाया जाता है।