बाग फरजाना की कहानी मुगल बादशाह शाहजहां से जुड़ती है। मुमताज महल की मौत के बाद शाहजहां मायूस रहने लगे थे। ऐसे में फरजाना बेगम उनकी चहेती बन गई। फरजाना उनके ससुर आसफ खां की बहन के बेटे जाफर खां की पत्नी थी। शाहजहां ने जाफर खां को पटना का सूबेदार बनाया तो वह वहां चला गया लेकिन फरजाना आगरा में ही रही।
इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे बताते हैं कि उस दौर की किताबों में भी इस किस्से का जिक्र है। शाहजहां ने फरजाना के लिए एक बाग बनाया। यही बाग फरजाना कहा जाने लगा। आज भी इसका नाम यही है। हालांकि अब यहां बाग नहीं बचा है। शाहजहां ने जब राजधानी दिल्ली बना ली तो बाग फरजाना में इमारतें बनने लगीं।
यहीं के थे अब्दुल करीम
इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के साथ जिस अब्दुल करीम के इश्क के चर्चे इतिहास की किताबों में दर्ज हैं और उन फिल्म तक बन चुकी है, वह बाग फरजाना के ही थे। सेंट्रल जेल बाग फरजाना में थी और करीम इस जेल में क्लर्क थे। उन्हें महारानी का उर्दू का टीचर मुकर्रर किया गया था। उन्होंने बाग फरजाना में भव्य कोठी बनाई जिसे करीम लॉज कहा जाता था।
अब अस्पताल हैं यहां पर
बाग फरजाना की पहचान अब अस्पतालों से है। यहां बड़ी संख्या में अस्पताल हैं और डॉक्टरों के आवास भी। यह शहर के पाश इलाकों में है।