इन नाटकों का किया निर्देशन
गिरगिट, गधा, टोपियों का बाजार, रिफंड, ऑपरेशन भारत, अंधेर नगरी, आगरा बोलता है, रसावतार, कृष्णा, औरतें, मैं भी पढ़ूंगा, बाबी की कहानी, अब हम आजाद हैं, नए समाज का निर्माण, चार किस्से चौपाल के, जरा हट के-जरा बच के, मीरा, होली, लल्लू लाल कौ रुपैय्या, प्लेटफार्म, रामलीला, मातादीन चांद पर, औरतें, द ब्लांड, बुरी द डैड, जात ही पूछो साधू की, श्याम रंग, रंगभूमि, लेजरांस एंड हिज बिलव्ड, लाइट आउट, हिलेना का हसबैंड, ताजमहल का टेंडर और जब शहर हमारा सोता है का निर्देशन किया।
इन नाटकों में दिया संगीत निर्देशन
कफन, सद्गति, खुदाई फौजदार, अंधेर नगरी, चौपाल, धूसर सपने, जैसा मुंह, वैसा तमाचा, उरु भंगम, कब तक पुकारुं, मध्यम वियोग।
नस-नस में है अभिनय
थियेटर एक्टर डिंपी मिश्रा के पिता राजेंद्र प्रसाद मिश्रा और मां रामेश्वरी मिश्रा का कहना है कि आइने के सामने खड़े होकर अभिनय करने की आदत उनमें बचपन से ही थी। बोले, डिंपी की नस-नस में अभिनय है। एक दिन भी ऐसा नहीं जाता, जिस दिन वह किसी न किसी किरदार के अभिनय का अभ्यास नहीं करता हो।