आगरा का लाल देवेंद्र सिंह बघेल सीमा पर शहीद हो गया। वो बीएसएफ की 173 बटालियन में सिपाही थे। जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर में सोमवार रात पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में देवेंद्र वीरगति को प्राप्त हुए।
दुश्मन की ओर से अंधाधुंध फायरिंग के बावजूद देवेंद्र हाथ में बंदूक थामे सीना ताने खड़े रहे। मालूम था कि कोई भी गोली सीना चीरकर निकल सकती है लेकिन मां भारती के लाल ने अपने प्राणों की परवाह नहीं की।
रात करीब साढ़े बारह बजे एक गोली उनकी दायीं आंख में लगी। लहुलुहान हो गए, लेकिन रणबांकुरे ने हिम्मत नहीं हारी। जिंदगी हाथ से फिसली जा रही थी, लेकिन देशभक्ति का जज्बा ऐसा था कि हाथ से बंदूक नहीं छोड़ी।
दुश्मन गोली पर गोली चलाए जा रहा था लेकिन फौलाद का हौसला लिए देवेंद्र सिंह सीना ताने खड़े रहे। उनकी कंपनी के अधिकारियों ने उनकी शौर्यगाथा उनके परिजनों को फोन पर सुनाई।
श्ाहीद जवान के मासूम बच्चेे
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घर में पत्नी पिंकी बाट जोह रही थी, 25 मई को बच्चे का जन्म दिन आने वाला था, देवेंद्र को छुट्टी लेकर इसमें शरीक होना था। उन्हें परिवार से बहुत प्यार था, लेकिन वतन से ज्यादा उनके लिए कुछ भी नहीं था।
गांव के रामपाल सिंह, ज्ञान सिंह और फूल सिंह बताते हैं कि देवेंद्र अक्सर कहते थे, सीमा पर हालात ठीक नहीं हैं। पाकिस्तान कभी भी फायरिंग शुरू कर देता है। मैं हंसते हंसते वतन पर अपनी जान कुर्बान कर दूंगा।
उनके भाई देवी सिंह ने बताया कि जब देवेंद्र घायल हो गए तो उनके साथियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया। बीएसएफ के अधिकारियों के पास उनका घर का फोन नंबर था। इसी पर जानकारी दी।
फोन देवी सिंह की पत्नी सुनीता ने रिसीव किया। तब देवेंद्र के घायल होने की बात बताई थी। देवी सिंह का कहना है कि उन्होंने वापस कॉल की तो पता चला कि रात में साढ़े तीन बजे भाई ने अस्पताल में अंतिम सांस ली।
छह साल पहले हुए थे बीएसएफ में भर्ती
सिंकदरा के गांव लखनपुर निवासी 28 वर्षीय देवेंद्र सिंह मार्च 2012 को बीएसएफ में भर्ती हुए थे। उनके बड़े भाई देवी सिंह सीआरपीएफ में है। उन्हीं को देखकर देवेंद्र ने सेना या अर्द्धसैनिक बल में जाने की ठानी थी।
देवेंद्र सिंह बघेल की शादी को तीन साल ही हुए हैं। बेटे धीरज का दूसरा बर्थ डे 25 मई को है। बेटी रितिका आठ महीने की है। उन्हें नहीं मालूम कि पिता दुनिया में नहीं रहे।
देवेंद्र के पिता नारायण सिंह को फालिज की बीमारी हो गई है। वो बुरी तरह से अस्वस्थ हैं। मां रामवती का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पत्नी पिंकी के भी आंसू नहीं थम रहे हैं।