आगरा निवासी राजीव ने पुलिस को बताया कि 12वीं पास करने के बाद उसने एक गैराज में काम करना शुरू कर दिया। करीब छह साल पहले उसकी मुलाकात मथुरा के हकीम व अमृतसर के कुख्यात वाहन चोर बब्बी से हुई। उसने उनके साथ मिलकर धंधा शुरू कर दिया। राजीव चोरी की कारों को खरीदकर आगे सप्लाई करने लगा।
हबीबुर रहमान की मणिपुर में जुम्मा से मुलाकात हुई। जुम्मा पूर्वोत्तर राज्यों में चोरी के वाहनों का बड़ा सौदागर था। जुम्मा के जरिये हबीबुर की मुलाकात कोलकाता के फराज वर्जी से हुई। फराज ने उसकी मुलाकात यूपी संभल के गुलाम नबी से करवा दी। डील के मुताबिक राजीव दिल्ली एनसीआर से गाड़ियां जुम्मा, फराज को पहुंचाएगा। इसी बीच जुम्मा ने हबीबुर की मुलाकात सागर व राजीव से करवाई।
इस तरह राजीव पंजाब, लखनऊ, संभल, कोलकाता के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में चोरी के वाहन भेजने लगा। लखनऊ में कई मामलों में राजीव की यूपी पुलिस को तलाश है। जुम्मा के इशारे पर सागर और हबीबुर हवाई जहाज से दिल्ली आते और चोरी की कार लेकर कोलकाता या पूर्वोत्तर राज्यों में लौट जाते थे।
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