यह हैं अधिवक्ताओं के सवाल
1. महामारी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने के बाद चार्जशीट लगाने में देरी क्यों लगा रही पुलिस। सामान्य अपराध में 30 दिन में चार्जशीट लगाने का प्रावधान होता है।
2. चिकित्सक की ओर से चौथ मांगने का मुकदमा दर्ज नहीं है। इसके बावजूद वीडियो बनाने के शक पुलिस आम लोगों को क्यों पकड़ रही है।
3. दंड प्रकिया संहिता की धारा 39 के अनुसार, जनता को अपराध की सूचना देने का अधिकार दिया गया है। इसमें हत्या और सदोष मानव वध की सूचना दी जा सकती है। फिर पुलिस आरोपी से पूछताछ की जगह वीडियो वायरल करने वाले को क्यों ढूंढ रही है।
4. पुलिस ने व्यापारी विनय बंसल को पकड़ा। उनका मोबाइल जब्त किया। उनसे पूछताछ की गई। पुलिस ने किस नियम के तहत मोबाइल को जब्त किया।
5. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 126 के अनुसार, इसमें कोई भी व्यक्ति अथवा लोकसेवक इस बात को बताने के लिए बाध्य नहीं होगा कि किसी भी अपराध की सूचना या होने की सूचना उसे कहां से मिली, किसी भी साक्ष्य के लिए यह नहीं पूछा जा सकता है कि वह आया कहां से है।
6. पुलिस की केस डायरी में भी मुखबिर का जिक्र होता है, जबकि मुखबिर का नाम नहीं लिखा होता है। तब फिर वीडियो बनाने वालों को पुलिस क्यों तलाश कर रही है।
7. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में आम जन के स्वास्थ्य और स्वास्थ्य साधन को बनाए रखने का अधिकार दिया गया है, इसे बनाए रखने का कार्य राज्य के नीति निदेशक तत्व का है। फिर ऑक्सीजन की कमी क्यों हुई, अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के नोटिस क्यों लगाए गए।
8. श्री पारस अस्पताल के मालिक ने ऑक्सीजन की मॉकड्रिल करके मरीजों की छंटनी की बात कही, इस तरह से उन्होंने लोगों को अधिकार से वंचित किया है। इसमें पुलिस सीधे मुकदमा दर्ज कर सकती है, फिर क्यों नहीं हुआ।
(इन सवालों को युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने उठाया है।)
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