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ताजनगरी मांगे जवाब: हर चुनाव में नेताओं ने किया खंडपीठ का वादा, 50 साल में भी नहीं हुआ पूरा

Tue, 06 Oct 2020 12:22 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • जिस आगरा में हाईकोर्ट की स्थापना हुई थी, वहां खंडपीठ के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है और वह मिल नहीं पा रही है। इसके लिए अधिवक्ताओं ने जनप्रनिधियों को जिम्मेदार ठहराया है।
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आगरा के अधिवक्ता अतिताभ शर्मा, दुर्गविजय सिंह 'भैया', मान सिंह चौहान, रमेश चंद्रा (क्रमश:) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के अधिवक्ताओं का कहना है कि हर चुनाव में सभी ने वादा किया है कि खंडपीठ की लड़ाई लड़ेंगे, पिछले 50 वर्षों से यह सिलसिला चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ है। कारण यह है कि सांसद हो या विधायक यहां सभी समर्थन करते हैं लेकिन संसद और विधानसभा में इस मुद्दे को नहीं उठाते।

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पिछले विधानसभा चुनाव में अधिवक्ताओं ने उम्मीदवारों से संकल्प पत्र भरवाए थे। सभी ने खंडपीठ का समर्थन किया था लेकिन न मौजूदा सरकार में और न ही इससे पिछली सरकार में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया।


जनप्रतिनिधियों ने कोशिश ही नहीं की
आगरा बार एसोसिएशन के सचिव अतिताभ शर्मा ने कहा कि हर चुनाव में उम्मीदवार यह वादा करते हैं कि खंडपीठ के लिए लड़ाई लड़ेंगे लेकिन यह सिर्फ चुनावी वादा है। जीतने केबाद इसे भूल जाते हैं। अगर सभी जनप्रतिनिधि मिलकर सरकार पर दबाव बनाएं तो खंडपीठ निश्चित रूप से मिल सकती है। 

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'जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं करा पाए'
एडवोकेट दुर्गविजय सिंह 'भैया' ने कहा कि आगरा में प्रधानमंत्री भी आ चुके, मुख्यमंत्री आते ही रहते हैं। यहां के विधायकों और सांसदों ने कभी मंच से उनके सामने यह मांग नहीं उठाई कि जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लागू कराकर आगरा में खंडपीठ स्थापित कराई जाए। 

'नेता विपक्ष में होते हैं, तो ही आवाज उठाते हैं'
एडवोकेट मान सिंह चौहान ने कहा कि खंडपीठ का आंदोलन लगभग 40 साल से चल रहा है। जनप्रतिनिधियों का हाल यह है कि जब विपक्ष में होते हैं तो आवाज उठाते हैं, अधिवक्ताओं के कंधे से कंधा मिलाकर चलने की बात करते हैं लेकिन जैसे ही उनके दल की सरकार आती है वह चुप हो जाते हैं।

'संसद, विधानसभा में नहीं उठाया सवाल'
एडवोकेट रमेश चंद्रा ने कहा कि आगरा में नौ विधायक हैं, दो सांसद हैं। लगभग हर सरकार में यहां से मंत्री रहे हैं। प्रदेश के भी और केंद्र के भी। इसके बावजूद खंडपीठ नहीं मिल रही तो सिर्फ एक ही वजह है कि ये लोग यहां तो कहते हैं कि हम खंडपीठ के पक्ष में है लेकिन न किसी विधायक ने विधानसभा में इसका सवाल उठाया है और न ही किसी सांसद ने संसद में।
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सभी जनप्रनिधियों को एकजुट होना पड़ेगा : रामसकल
पूर्व राज्य मंत्री प्रदेश सरकार के रामसकल गुर्जर ने कहा कि खंडपीठ आगरा की आवश्यकता भी है और हक भी। इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होना पड़ेगा। जब मैं मंत्री था, तब सरकार में मांग रखी थी लेकिन अलग-अलग प्रयास के बजाय एकसाथ दबाव बनाना होगा। 

और प्रयास किए जाने की जरूरत है - धर्मपाल
एत्मादपुर के पूर्व विधायक धर्मपाल सिंह ने कहा कि खंडपीठ के लिए सभी राजनीतिक दलों, सभी संगठनों को एकसाथ मिलकर प्रदेश और केंद्र सरकार पर दबाव बनाना होगा। मैं जब विधायक था, तो यह मुद्दा सरकार के सामने रखा था लेकिन सफलता नहीं मिली।
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