'जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं करा पाए'
एडवोकेट दुर्गविजय सिंह 'भैया' ने कहा कि आगरा में प्रधानमंत्री भी आ चुके, मुख्यमंत्री आते ही रहते हैं। यहां के विधायकों और सांसदों ने कभी मंच से उनके सामने यह मांग नहीं उठाई कि जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लागू कराकर आगरा में खंडपीठ स्थापित कराई जाए।
'नेता विपक्ष में होते हैं, तो ही आवाज उठाते हैं'
एडवोकेट मान सिंह चौहान ने कहा कि खंडपीठ का आंदोलन लगभग 40 साल से चल रहा है। जनप्रतिनिधियों का हाल यह है कि जब विपक्ष में होते हैं तो आवाज उठाते हैं, अधिवक्ताओं के कंधे से कंधा मिलाकर चलने की बात करते हैं लेकिन जैसे ही उनके दल की सरकार आती है वह चुप हो जाते हैं।
'संसद, विधानसभा में नहीं उठाया सवाल'
एडवोकेट रमेश चंद्रा ने कहा कि आगरा में नौ विधायक हैं, दो सांसद हैं। लगभग हर सरकार में यहां से मंत्री रहे हैं। प्रदेश के भी और केंद्र के भी। इसके बावजूद खंडपीठ नहीं मिल रही तो सिर्फ एक ही वजह है कि ये लोग यहां तो कहते हैं कि हम खंडपीठ के पक्ष में है लेकिन न किसी विधायक ने विधानसभा में इसका सवाल उठाया है और न ही किसी सांसद ने संसद में।