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अमर उजाला के खुलासे से विपणन विभाग में मचा हड़कंप, गोदाम इंचार्ज को हटाया

Tue, 30 Jun 2015 02:11 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
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रीजनल फूड कारपोरेशन के रुनकता स्थिति गोदाम में अनाज सड़ने के खुलासे के बाद विपणन विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने गोदाम के इंचार्ज को हटा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। विभागीय कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। गोदाम में पूर्व में भी तैनात रहे कर्मचारियों से रिकवरी के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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बता दें, अमर उजाला ने सोमवार के अंक में आरफसी के रुनकता स्थित गोदाम में अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण बारिश में भीगने से हजारों टन गेहूं सड़ने का खुलासा किया था। इस पर खाद्य एवं विपणन विभाग के अधिकारी दौड़ पड़े। आरएफसी सीपी सिंह ने जिला विपणन अधिकारी राजेश्वर सिंह को जांच कर तुरंत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इसके बाद  डीपीआरएम मथुरा और डीपीआरएम फीरोजाबाद को भी जांच के लिए भेजा। दोपहर तकरीबन दो बजे आरएफसी सीपी सिंह खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया गोदाम के इंचार्ज पंकज सिंह को दोषी पाया गया है। उसके खिलाफ पहले भी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कई डीलर भी शिकायत कर चुके हैं। उसे तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया। एक जुलाई को नए अधिकारी की तैनाती की जाएगी।
उनका कहना है कि खुले में रखा अनाज खराब नहीं हुआ है। कुछ सीलन आई थी, उसे सुरक्षित रखवा दिया गया और कोटेदारों को आवंटित कर दिया गया। बोरियां जरूर खराब हुई हैं। इस नुकसान की भरवाई पूर्व इंचार्ज अरविंद कुमार से की जाएगी।
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‘अनाज सड़ने का मैं नहीं, अफसर जिम्मेदार’
गोदाम के इंचार्ज पंकज सिंह ने गेहूं खराब होने का ठीकरा अफसरों के सिर फोड़ा। पूछने पर पंकज सिंह का कहना था कि गोदाम में इतने खाद्यान्न को रखने की क्षमता नहीं है। उसने तीन बार अधिकारियों को पत्र लिखकर खुले में रखे गेहूं और चावल के लिए वाटर प्रूफ तिरपाल, बेस बनाने के लिए लिखा था लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जब उनसे इन पत्रों की प्रति मांगी गई तो चुप्पी साध ली। कहा कि 15 जून को टेलीफोन करके भी तिरपाल की डिमांड की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पंकज सिंह पर आरोप है कि ड्यूटी पर शराब पीकर आते हैं, इस सवाल पर वह कुछ नहीं बोले।

इनसेट
क्षमता से अधिक है गोदाम में अनाज
खाद्यान्न सड़ने के मामले में अफसर भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं। दरअसल गोदाम की क्षमता करीब 35 हजार क्विंटल खाद्यान्न रखने की है। यहां से प्रतिमाह करीब 14 हजार क्विंटल खाद्यान्न का आवंटन होता है। लेकिन इस बार करीब 16 हजार क्विंटल अतिरिक्त खाद्यन्न आ गया था। इसके साथ ही करीब तीन माह के मिड-डे मील का उठान भी एफसीआई के गोदाम से कर लिया गया था, लेकिन इस अतिरिक्त खाद्यान्न की सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं किए। तुर्रा यह कि यहां बारदाने रखने की व्यवस्था न होने के बावजूद हजारों की संख्या में बोरियों के बंडल रख लिए। जिस टीन शेड में अनाज रखा जाना था वहां बोरियों के बंडल ठूंस दिए गए हैं और सैकड़ों की संख्या में बाहर बंडल रखे हैं, जो सड़ चुके हैं।
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ठिकाने लगा दिया सड़ा हुआ गेहूं
मुंह अंधेरे बुला लिए गए थे पल्लेदार, खुले में रखा गेहूं अंदर रखवाया
बचा हुआ गेहूं, चावल आननफानन में डीलरों को कर दिया आवंटित

आगरा। रुनकता स्थित गोदाम में सड़े हुए खाद्यान्न को अधिकारियों ने ठिकाने लगा दिया है। सोमवार तड़के ही पल्लेदारों को बुला लिया गया। खुले में रखे गेहूं और चावल के बोरों को टीनशेड के अंदर रखवा दिया गया। जो बचा उसे राशन डीलरों को बुलाकर कोटा आवंटित कर दिया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वे अपनी करतूत पर पर्दा नहीं डाल सके।
अमर उजाला की टीम सुबह हालातों का जायजा लेने पहुंची तो खुले आसमान के नीचे रखे गेहूं चावल के बोरे वहां से गायब मिले। सूत्रों ने बताया कि सुबह पल्लेदारों को बुला लिया गया था। साथ ही आसपास के राशन डीलरों को भी कोटा आवंटन के लिए कह दिया गया था। जिससे वहां तमाम राशन डीलर पहुंच गए। जितना खाद्यान्न टीनशेड में सुरक्षित रखा जा सकता था रख दिया, शेष बोरों को डीलरों के ट्रक, मेटाडोर और ट्रैक्टर ट्राली में रखवा दिया गया। बताया जाता है कि कुछ डीलरों ने भीगा हुआ गेहूं लेने से इनकार दिया था। उनका कहना था कि कोई राशन कार्ड धारक काले पड़ चुके चावल और भीगे हुए गेहूं को नहीं लेगा, लेकिन उनकी एक न सुनी। वहीं खराब हो चुके बारदाने की हजारों बोरियों को ठिकाने नहीं लगाया जा सका।
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