भोगांव। श्री पार्श्वनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के अंतिम दिन मुनिराज पार्श्वनाथ को मोक्ष की प्राप्ति का दृश्य मंच पर दिखाया गया। भगवान का विरह होते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। जिनबिम्बों की प्राण प्रतिष्ठा पूर्ण होते ही नवीन प्रतिमाओं को नवीन मंदिर में वेदी पर स्थापित कर दिया गया। महोत्सव की अंतिम रथयात्रा में भी श्रद्धालुओं का जोश दिखाई दिया और महिलाएं और बच्चे जमकर झूमे।
पंचकल्याण महामहोत्सव के छठवें दिन मैनपुरी रोड स्थित काल्पनिक बनारस नगरी में मोक्ष कल्याणक की पूजा की गई। प्रतिष्ठाचार्य पंडित अभिनंदन शास्त्री ने भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण महोत्सव की प्रक्रिया पूरी कराई। भगवान को मोक्ष होते ही पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। देवलाली महाराष्ट्र से आए जैन विद्वान पंडित अभय कुमार शास्त्री ने धर्मसभा में कहा कि जब धरती पर आने के बाद पार्श्वनाथ के पांच कल्याणक पूरे हुए और वे सदा-सदा के लिए सिद्ध दशा प्राप्त कर अनंत सुख का भोग कर रहे हैं। तीर्थंकर भगवान को भी मुनिदशा हुए बिना कभी मुक्ति प्रकट नहीं होती । इसलिए वैराग्य होने पर वे स्वयं दीक्षा अंगीकार करते हैं, आत्मध्यान में लीन होते हैं और केवलज्ञान की प्राप्ति करते हैं।
इस दौरान मनीष जैन, राकेश कुमार जैन, आशीष जैन आशू, वैभव जैन, अंबुज जैन, कुमुद जैन, सौरभ जैन, डाॅ. मयंक जैन, हर्षित शास्त्री, संजय शास्त्री आदि मौजूद रहे।
उदयपुर की बालिकाओं ने की नाटिका पेश
महोत्सव के विशाल मंच पर शाश्वत धाम, उदयपुर से आईं 21 बालिकाओं ने विशेष नाटिका बंधुश्री का मंचन किया। बालिकाओं ने इस नाटिका के जरिए युवतियों को गैर जाति विवाह से सचेत किया। भारतीय परंपरा को कायम रखने की अपील करते हुए बालिकाओं ने सजातीय विवाह और परिवार की सहमति से ही विवाह संपन्न करने का संदेश दिया। आयोजन समिति ने नाटिका प्रस्तुत करने वाली बालिकाओं तथा उनकी टीम को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।