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तेंदुए ने छलांग लगाई, पुलिसवालों की जान पर बन आई

Tue, 26 Apr 2016 01:22 AM IST
अमर उजाला आगरा
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तेंदुअा - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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चंद्र मोहन शर्मा
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दोपहर के 3:30 बजे का वक्त। सुरेश नगर की कोठी नंबर 10 बी। अंदर 20 पुलिसवाले। बाहर 1000 लोगों की भीड़। तमाम निगाहें कोठी के किचिन पर। तेंदुआ इसी में बंद है। डर है कि कहीं बाहर न निकल आए। किचिन के दरवाजे का एक हिस्सा टूटा है। क्या करें, कैसे बचें? यही सोच रहे हैं पुलिसवाले। तभी एक ख्याल आया है। लकडी़ का बड़ा सा तख्त लेकर छह पुलिसवाले चल रहे हैं किचिन की ओर। टूटे हिस्से पर इसे लगाना है। सोच रहे हैं तेंदुए को थोड़े ही पता चलेगा बाहर क्या चल रहा है? मगर तेंदुआ भी चौकन्ना है। खट-पट हुई नहीं कि कान खड़े हो गए। पुलिसवाले थोडे़ बेफिक्र हैं। जैसे ही दरवाजे के नजदीक पहुंचे हैं, चेहरे पर सफलता के भाव आने लगे हैं। मगर ये क्या? तेंदुआ को पूरा प्लान पता चल गया। उसे गुस्सा आ गया। जोर से गुर्रा रहा है। पुलिस वाले घबरा गए। क्या करें, आगे बढ़ें या नहीं, खतरा तो नहीं है, सोच ही रहे हैं कि अगले ही पल आंखों के सामने तेंदुआ आ गया है। छलांग लगा दी है उसने। पुलिसवालों के होश उड़ गए हैं। सांस अटकी रह गई है। जान पर जो बन आई है।  उसी तख्त के नीचे से होकर तेंदुआ निकल गया। तख्त कहीं गिरा, पुलिसवाले कहीं। और तेंदुआ दौड़ता चला गया। 42 वर्ग गज की पूरी कोठी का एक चक्कर लगाकर वापस उसी जगह आया है जहां से चला था। एक मिनट में उसने यह दूरी पूरी की है। पुलिसवाले अभी भी उसी मुद्रा में खड़े हैं। रोंगटे तक खड़े हैं उनके। शायद भूल गए हैं कि तख्त क्यों लाए हैं? तेंदुआ फुर्ती के साथ किचिन में जाकर लेट गया है। अगले ही पल पुलिसवाले दूर चले गए हैं। इसके बाद तो सुरेश नगर ही नहीं, आस पास के पूरे इलाके में हल्ला मच गया है तेंदुआ आया... तेंदुआ आया। हजारों लोग और आ गए हैं।


पुलिस तो तेंदुए को मार ही डालती
 तेंदुए की किस्मत अच्छी रही जो बच गया। अगर शाम को कमरे से निकलकर भागता तो जान बचनी मुश्किल थी। एक तरफ लोग लाठी-डंडे ही नहीं बल्लियां और सरिए तक लिए खड़े थे। दूसरी ओर पुलिसवालों ने एके-47, एमपी-5 राइफल और पिस्टल तान रखी थी। अंदर कमरे में तेंदुआ था, बाहर पुलिसवाले अलर्ट थे। अगर वह इनकी ओर आ जाता, तो शायद ये खुद को गोली चलाने से बचा नहीं पाते। बेचारा तेंदुआ एक ही गोली में ढेर हो जाता। आपरेशन तेंदुआ में पुलिस की कई खामियां सामने आई हैं। उसे पकड़ने का प्लान बाद में बना, पहले तो पुलिसवाले उस पर अटैक करने की पोजिशन में नजर आए।
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हरीपर्वत सर्किल के सीओ एडिशनल एसपी अनुराग वत्स साढ़े तीन बजे पहुंचे। उन्होंने कोठी में दाखिल होते ही अपने पिस्टल निकाल ली। उनके साथ खड़े पुलिसवाले भी पोजिशन में आ गए। जिस कमरे में तेंदुआ था, उसके दोनों ओर पुलिसवाले राइफल तानकर खड़े हो गए। अगर वह इन पर हमला बोल देता, तो क्या ये खुद को गोली चलाने से रोक पाते?
पुलिस की और भी खामियां रहीं। एक तो शुरू में मामला गंभीरता से नहीं लिया। पहली सूचना पर चीता मोबाइल के सिपाही भेज दिए गए। दूसरा, जिस कोठी में तेंदुआ दिखाई दिया था, उसके आस पास भीड़ जमा होने दी गई। अगर तेंदुआ इनकी ओर भागता, तो भगदड़ मच सकती थी। तेंदुए को पकड़ने के लिए भी कोई समझदारी नहीं दिखाई गई। उसे कमरे में बंद किया जा सकता था, ऐसा बाद में किया भी गया, लेकिन इससे पहले ही पुलिस वाले लाठी-डंडे लेकर पहुंचे। उस कोठी के दरवाजों पर जाल लगाया जा सकता था लेकिन यह काम भी बहुत बाद में किया गया।
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 तख्त उठा लाए पुलिसवाले
तेंदुआ एक कमरे में बंद था, उसके दरवाजे का एक हिस्सा टूटा हुआ था। पुलिस को लगा कि तेंदुआ इसमें से बाहर आ सकता है। इसे जाल से बंद नहीं किया गया। इसे बंद करने के लिए पुलिस लकडी़ का तख्त ले आई। यह भी नहीं सोचा कि नजदीक जाने पर तेंदुआ हमला कर सकता है। हुआ भी यही। जैसे ही पुलिस नजदीक पहुंची, तेंदुआ बाहर निकलकर भागा। पुलिस वाले तख्त छोड़कर खड़े हो गए।
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