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दशकों के बाद होली दहन पर बन रहा हस्त नक्षत्र और वृद्धि योग का संयोग

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सोरों (कासगंज)। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार रविवार को है। इस दिन होलिका दहन अगले दिन सोमवार को रंगोत्सव मनाया जाएगा। इस वर्ष होली पर्व पर ग्रहों नक्षत्रों का विशेष सहयोग बन रहा है।
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होलिका दहन में भद्रा की बाधा इस बर नहीं होगी तो हस्त नक्षत्र और वृद्धि योग उन्नति के संकेत देंगे। त्योहार के लिहाज से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी यह नक्षत्र व संयोग शुभ माने गए हैं। ज्योतिषाचार्यों ने विधि विधान से होलिका दहन पूजन की सलाह दी है।
होलिका दहन शाम को गो-धूल बेला में शुभ माना गया है। भद्रा योग में होलिका दहन बेहद अशुभ माना जाता है। वर्षों से भद्रा का साया होलिका दहन के दौरान रहा है लेकिन कई दशकों वर्षों बाद इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा की बाधा नहीं होगी।
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ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस साल हस्त, नक्षत्र और वृद्धि योग में होलिका दहन होगा जो बेहद फलदाई माने गए हैं। इसके साथ ही सर्वाधिक सिद्ध योग भी होलिका दहन के दौरान रहेगा।
यह रहेगा मुहूर्त:
- रविवार दोपहर 1:52 बजे खत्म हो जाएगा भद्रा काल
- शाम 6:50 से रात 8 बजे तक होगा होलिका पूजन का समय
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक यह अपनाएं विधि-
- बीमारी से बचाव को गुलाब के पांच पुष्प हनुमानजी पर चढ़ाएं
- व्यापार में वृद्धि के लिए 11 नजर बट्टू, 5 गोमती चक्र अपने सामने रखकर हनुमान चालीसा का करें पाठ
- रोजगार प्राप्ति के लिए होली के दिन हनुमानजी की पूजा करें
- गृह क्लेश से बचने के लिए पानी के मटके से पानी निकालकर छिड़काव करें खुशहाली रहेगी
ज्योतिषाचार्यों की बात:
प्रति वर्ष फाल्गुन मास की शुक्ल पूर्णिमा पर होली का त्योहार मनाया जाता है। वसंत ऋतु में होने के कारण वसंतोत्सव भी कहा जाता है। होलिका दहन भद्रा रहित समय में ही किया जाना शुभ माना गया है। होलिका दहन से पूर्व होली का पूजन करने की भी परंपरा है। - प्रशांत कोठेवार
होलिका पूजन के बाद होलिका दहन किया जाना चाहिए। हस्त नक्षत्र, वृद्धि एवं सर्वार्थ सिद्ध योग का संयोग है। कई दशकों के बाद यह संयोग बन रहा है। हमारे पास 100 वर्ष का जो पंचांग है उसमें तो ऐसा योग पहली बार बन रहा है। उन्नति के संकेत इस योग में मिलते हैं। - पंडित जगदीश महेरे।
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