वार्मर की जानकारी देते मेलोडी वेस्टर्न
आगरा। सिकंदरा स्थित उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल को अमेरिकी सामाजिक संगठन एंब्रेस ग्लोबल से एडवांस दो वार्मर मिले हैं। ये डिवाइस से संचालित होंगे। इसके लिए टेक्नीशियन की जरूरत नहीं है। इससे हाइपोथर्मिया पीड़ित नवजात को प्रसूता से अलग वार्मर में रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे नवजात को जरूरी ताप मिलेगा और जान बचेगी। ऐसी सुविधा वाला प्रदेश में यह पहला अस्पताल बन गया है।
अस्पताल परिसर में संस्था की सीईओ मेलोडी वेस्टन ने बताया कि यह वार्मर 30-40 मिनट चार्ज करने के बाद 4 घंटे तक चलेगा। इसे तीमारदार और प्रसूता भी संचालित कर सकेगी। यह पोर्टेबल है और इसे आसानी से आपातकाल स्थिति में कहीं भी लेकर जा सकते हैं। इसे पांच साल के शोध के बाद स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने विकसित किया है। ये वार्मर नवजात के शरीर के जरूरी ताप को नियंत्रित रखेगा। संस्था के सीनियर डायरेक्टर रामकृष्ण यूएच ने बताया कि 25 देशों में ये वार्मर उपयोग में लाए जा रहे हैं। ये 2-4 लाख रुपये का है और अस्पतालों में संचालित वार्मर की कीमत 20-25 लाख रुपए है। अस्पताल के एमडी और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि हाइपोथर्मिया से पीड़ित नवजातों को प्रसूताओं से अलग कक्ष में बने वार्मर में रखा जाता था। अब एक ही बिस्तर पर जच्चा-बच्चा रह सकेंगे। उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल इस सुविधा वाला प्रदेश में पहला अस्पताल बन गया है। रेनबो आईवीएफ की एमडी और बांझपन विशेषज्ञ डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि एडवांस वार्मर के साथ प्रसूता शिशु को स्तनपान भी करा सकती है। टीम ने इसका डेमो भी दिखाया। डॉ. नीहारिका मल्होत्रा, डॉ. देवाशीष मजूमदार, डॉ. केशव मल्होत्रा, डॉ. मानवेंद्र चौहान, डॉ. राहुल देव शर्मा, डॉ. वीके मित्तल, डॉ. विशाल गुप्ता, जोनल हेड तेज सिंह, यूनिट हेड अभिषेक जैन और महाप्रबंधक राकेश आहूजा ने संस्था का आभार जताया।