भारत के पहले अंतरिक्ष मानव मिशन के यात्रियों को सुरक्षित लौटाने की जिम्मेदारी आगरा के हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) की है। अंतरिक्ष से धरती की कक्षा में प्रवेश के बाद क्रू मॉड्यूल को पानी या जमीन पर एडीआरडीई के बनाए पैराशूट ही लेकर आएंगे।
किसी भी दुर्घटना की स्थिति में क्रू एस्केप सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखेगा। इसका परीक्षण श्रीहरिकोटा में हो भी चुका है। अंतरिक्ष मिशन में यह रिकवरी सिस्टम पूरी तरह से स्वदेशी है। एडीआरडीई के बनाए पैराशूट अंतरिक्ष मिशन के दौरान क्रू मॉड्यूल को उतारने में सक्षम हैं।
इसका परीक्षण आईआईटी कानपुर और इसरो की टीम कर चुकी हैं। मानव मिशन में उपयोग होने वाला क्रू मॉड्यूल दो अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बनाया गया है, जिसे तीन के लिए भी तैयार किया जा सकता है। पूर्व में मार्स मिशन में भी एडीआरडीई के पैराशूट की मदद से ही रोवर मंगल की सतह पर पहुंचाया गया था।