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तीन बच्चियों की मर्डर मिस्ट्री, एक ही तरीके से ली गई थी जान, नहीं लगा कातिलों का सुराग

Thu, 22 Nov 2018 04:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : डेमो
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मासूम बच्ची कहीं जा रही होती है और उनका अपहरण करने के बाद हत्या कर लाश फेंक दी जाती है। शव मिलता है तो कोहराम मच जाता है। इसी तरीके से आगरा के खंदौली में एक के बाद एक तीन बच्चियों की हत्या की गई।    
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एक में तो नामजद आरोपी पर ही पुलिस ने चार्जशीट लगा दी लेकिन दो की हत्या के रहस्य पर अभी भी पर्दा पड़ा है। कातिल का पता नहीं चल पाया है। पुलिस अपनी फाइल बंद कर चुकी है लेकिन लोगों के जेहन से वे कत्ल मिटे नहीं हैं।

पहली घटना :
26 मई 2011 को कसबा निवासी भुट्टो खां की आठ साल की बेटी तराना तीन साल की बहन चायना के साथ शौच के लिए गई थी। तभी बाइक सवार दो युवक तराना को अगवा कर ले गए थे। इसके बाद उसका सुराग नहीं लग सका था। 
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खेत में मिला शव

दो दिन बाद 28 मई 2011 को गांव गढ़ी नैनसुख के पीछे बंबा वाले रोड पर खेत में तराना का शव पड़ा मिला था। पुलिस ने जांच की थी। बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। हत्याकांड के मामले में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल सका। पुलिस ने 21 पर्चे भी काटे। विवेचक भी कई बार बदल गए। 15 महीने बाद केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।

दूसरी घटना :
आठ अक्तूबर 2011 को कस्बा के मोहल्ला व्यापारियन के रहने वाले पप्पू की छह साल की बेटी माना टेसू और झांझी लेकर अन्य बच्चों के साथ गई थी। इसके बाद लौटकर नहीं आई। परिजनों ने काफी तलाश भी किया था, लेकिन पता नहीं चल सका। 

दूसरे दिन गांव कैमरा और नगलादीन के बीच बच्ची का शव गड्ढे में पड़ा मिला था। सूचना पर आए परिजनों ने शिनाख्त की थी। पुलिस की कई टीम घटना के खुलासे के लिए लगाई गईं, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका। यही वजह है कि 10 अगस्त 2012 को पुलिस ने इस केस में भी एफआर लगा दी।

तीसरी घटना

तराना और माना की हत्या से पहले  22 अप्रैल 2011 को नौ साल की मुस्कान सैमरा मेले से लापता हो गई थी। दूसरे दिन उसका शव गांव के कुएं में पड़ा मिला था। परिजनों ने अज्ञात आरोपी बताए थे। पुलिस ने जांच की। 

बाद में एक आरोपी सामने आया, जिसके खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था। साक्ष्य के अभाव में वह कोर्ट से छूट गया। इसके बाद फिर से जांच नहीं की गई। 

गुत्थी सुलझाने में एसटीएफ भी हार गई
मामला शासन स्तर पर उठने पर जांच के आदेश दिए गए। इसके बाद क्राइम ब्रांच और एसटीएफ ने जांच शुरू की, लेकिन आज तक कोई नतीजा सामने नहीं आ सका। यही वजह है कि दोनों केस की फाइल अब क्राइम ब्रांच और एसटीएफ भी बंद कर चुकी है।
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अब क्राइम ब्रांच के सामने है चुनौती

दोनों मामले विधान परिषद की समिति में उठाए गए थे। इसके बाद शासन स्तर से मामले में जांच के आदेश किए गए थे। बच्चियों के साथ हुई घटनाओं को गंभीरता से लेने को कहा गया था। हाल ही में दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को दी गई है। क्राइम ब्रांच भी सुराग तलाश में लगी है। क्योंकि केस में आरोपी अज्ञात होने के कारण पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है।

हर कदम पर चूक करती रही पुलिस
- पहली हत्या के बाद पुलिस ने मामला रंजिश का माना। दूसरी हत्या ठीक उसी तरह से हो जाने के बाद भी लाइन नहीं बदली जबकि साफ लग रहा था कि कातिल अलग अलग नहीं हैं। 
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था। उनके शरीर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने बगैर किसी साक्ष्य के तंत्र मंत्र की लाइन पर जांच शुरू कर दी।
- तीन बच्चियों की एक ही तरीके से की गई हत्या किसी सिरफिरे कातिल की क्रूरता लग रही थी। पुलिस ने इस बिंदू पर देरी से जांच की।
- इतने गंभीर मामलों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाने में जल्दबाजी की। क्राइम ब्रांच और एसटीएफ को बहुत देरी से लगाया गया।
- सबसे बड़ी चूक यही थी। मामला पेचीदा था। कत्ल की गुत्थी उलझी हुई थी। पुलिस बार बार विवेचक बदलती रही। एक कुछ सुराग जुटाता, तभी दूसरा जांच के लिए आ जाता।
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