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शहीद के परिवार को पट्टा मिली जमीन पर 22 साल बाद भी नहीं मिला कब्जा

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बाह। कारगिल की जंग में शहीद हुए बाह के कोरथ गांव के नायब सूबेदार लायक सिंह के परिवार को पट्टे में मिली जमीन पर 22 साल बाद भी सरकार कब्जा नहीं दिला सकी है। उपेक्षा का आलम यह है कि शहादत दिवस पर भी परिवार के आंसू पोंछने कोई नहीं पहुंचता।
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कारगिल शहीद नायब सूबेदार लायक सिंह के परिवार को 10 बीघा जमीन का पट्टा मिला था। तब से 22 साल बीत गए। जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है। शहीद लायक सिंह के भाई सतेंद्र सिंह ने बताया कि जमीन पर कब्जे के लिए विभिन्न स्तरों पर शिकायत की गई। लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
इतना ही नहीं उनके घर के ऊपर से बिजली की लाइन खींच दी है। एचटी लाइन का बनाया जाल दीवार को छूता है। इसकी शिकायत भी शिकायत किसी ने नहीं सुनी। मां रामश्री को पेंशन का आश्वासन मिला था। पेंशन के इंतजार में वह भी 2015 में चल बसी। सैनिक बोर्ड द्वारा भी उनकी समस्या जानने का कभी प्रयास नहीं किया गया।
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बताया कि पहले शहादत दिवस पर एसडीएम श्रद्धांजलि देने के लिए आए थे, उसके बाद से किसी ने परिवार की कोई सुधि नहीं ली। तब से शहादत दिवस पर भी परिवार की कोई सुध लेने को नहीं आता। लायक सिंह के नाम पर गांव में बना शहीद मार्ग भी उखड़ा पड़ा है। वीरनारी शकुंतला देवी ने 2001 में शहीद स्मारक बनवाया। उसमें ग्राम पंचायत नेे सोलर लाइट लगवाई थी, जो खराब होने पर पिछले साल उखाड़ ली गई।
इसी तरह कारगिल में शहीद हुए मलूपुर के धर्मवीर सिंह के परिजन सरकार की वादा खिलाफ से खिन्न हैं। शहीद की बहन बबिता ने बताया कि सरकार ने और तो सभी वादे पूरे किए लेकिन परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही थी। काफी प्रयासों के बाद भी नौकरी नहीं दी गई।
बताया कि धर्मवीर दो भाइयों में बडे़ थे, छोटे भाई रवि की करंट लगने से मौत हो गई। चार बहनों में सभी की शादी हो चुकी है। घर में छोटे भाई रवि की पत्नी और लड़का, शहीद की मां श्रीमती के साथ रहती है। मां आज भी धर्मवीर को भुला नहीं सकी हैं। त्योहार पर पहले धर्मवीर के लिए खाना निकालती हैं। इसके बाद ही परिवार के अन्य लोग खाते हैं। संवाद
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