आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की टीम ने शनिवार को यमुनापार इलाके में यमुना के डूब क्षेत्र में आ रहे एक निर्माण को ध्वस्त किया। इस निर्माण के संबंध में पिछले दिनों आगरा में एनजीटी के लोकल कमिश्नर ने भी सवाल उठाए थे। दिन भर चली मशक्कत के बाद भी पूरा निर्माण नहीं ढहाया जा सका है। टीम पुन: जेसीबी लेकर जाएगी।
यमुनापार में जगदंबा डिग्री कालेज के पास संजय कुमार गुप्ता का निर्माण है। विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक इस अवैध निर्माण के संबंध में प्राधिकरण ने पहले से ही नोटिस जारी कर दिए थे। मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में गया। सिंचाई विभाग और प्राधिकरण की ओर से नापजोख करने के बाद तय हुए डूब क्षेत्र में भी यह निर्माण आ रहा था। पिछले दिनों डूब क्षेत्र में हुए निर्माणों का सर्वे करने आए एनजीटी के लोकल कमिश्नर ने भी इस निर्माण पर सवाल उठाए थे।
शनिवार को उप सचिव जगदीश यादव के नेतृत्व में एडीए की टीम निर्माण को ध्वस्त करने पहुंच गई। टीम ने तीन ओर की दीवारों को ध्वस्त कर दिया है। अभी एक दीवार और बाकी है। कल फिर टीम जेसीबी लेकर जाएगी। कार्रवाई के दौरान अधिशासी अभियंता राजीव दीक्षित, सोनी, बिजेंद्र सिंह, फजल अहमद आदि मौजूद रहे।
कल एनजीटी में सुनवाई
आगरा। यमुना नदी के डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों के मामले की सात नवंबर को एनजीटी में सुनवाई होगी लेकिन इस मामले की पैरवी करने वाले डीके जोशी नहीं होंगे। दरअसल यमुना के डूब क्षेत्र में हुए निर्माणों के मामले को डीके जोशी ही एनजीटी में लेकर गए थे। सात नवंबर को सुनवाई की तारीख है। इससे पहले एडीए ने शनिवार को अवैध निर्माण ध्वस्त कर यह दिखाने की कोशिश की है कि कार्रवाई लगातार जारी है।
एडीए की सील से आजाद होंगी इमारतें
आगरा। नई भवन निर्माण उपविधि लागू होने से अब शहर में ऐसे भवन निर्माताओं और बिल्डरों को राहत मिलेगी जिनकी इमारतें सील पड़ी हैं। विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने शहर में ऐसी सभी इमारतों की फाइलों को खोलने का एलान कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक जितना एरिया कंपाउंड लिमिट में होगा उससे कंपाउंड कर दिया जाएगा शेष निर्माण को ध्वस्त करा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि शहर में करीब 114 भवन ऐसे हैं जिन पर प्राधिकरण की सील लगी है। इनमें कुछ इमारतें ऐसी हैं जिनका मानचित्र तो विकास प्राधिकरण से स्वीकृत है लेकिन निर्माणकर्ताओं ने मानचित्र के विपरीत निर्माण किया है। वहीं तमाम इमारतें ऐसी हैं जिनका मानचित्र स्वीकृत ही नहीं हुआ है। लोगों ने प्राधिकरण के नोटिस के बावजूद निर्माण किया है।
निर्माण को सील करने का नियम है कि सील करने के 15 दिन के भीतर या तो उसे कंपाउंड किया जाए यदि कंपाउंड नहीं किया जा सकता है तो ऐसे निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाए लेकिन शहर में तमाम इमारतें ऐसी हैं जिन पर सील लग गई है। इन्हें कई वर्ष बीत चुके हैं। एडीए उपाध्यक्ष अजय यादव ने बताया कि नई भवन निर्माण उपविधि को प्राधिकरण बोर्ड ने अंगीकृत कर लिया है। नए नियमों से भवन स्वामियों को काफी राहत मिलेगी। एफएआर बढ़ाया गया है और बेसमेंट में राहत दी गई है। इसलिए सभी सील भवनों की फाइलों का परीक्षण कराया जा रहा है। नए नियमों के मुताबिक जो भवन कंपाउंड हो सकेगा उससे कंपाउंड किया जाएगा। जिसका ध्वस्तीकरण होना आवश्यक है उसे ध्वस्त किया जाएगा। अब किसी भी फाइल को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जाएगा।