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एडीए को 25 लाख रुपये के जुर्माने से नहीं मिली राहत

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आगरा। नालंदा टाउन कॉलोनी का सीवर खुले मैदान मे छोड़ने के मामले में एडीए पर लगाए गए 25 लाख रुपये का जुर्माना नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बरकरार रखा है। एडीए ने एनजीटी से इसे माफ करने की याचिका दायर की थी, पर एनजीटी ने कहा कि जो हालात हैं, उससे ट्रिब्यूनल संतुष्ट नहीं है।
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एनजीटी ने दो महीने के अंदर सीवर ट्रीटमेंट की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं और 11 नवंबर को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से एडीए उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त और अपर मुख्य सचिव नगर विकास को तलब किया है। 6 जुलाई को आगरा विकास प्राधिकरण और अपर मुख्य सचिव नगर विकास द्वारा इस मामले में जो जवाब दिया गया, उससे ट्रिब्यूनल संतुष्ट नहीं हुआ।
एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल, एक्सपर्ट मेंबर प्रो. ए सेंथिल वेल की बेंच ने देवांशु बोस की याचिका पर एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
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एडीए ने 10 अगस्त तक धांधूपुरा एसटीपी के जरिए सीवर निस्तारण की बात की है। तब तक टैंकरों के जरिए खुले मैदान से सीवर को ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाया जा रहा है। एनजीटी ने इस पर नाराजगी जाहिर की। इससे पहले एनजीटी बेंच ने अपने पूर्व के आदेश में कहा था कि एडीए अपनी ड्यूटी निभाने में फेल साबित हुआ है। एडीए उपाध्यक्ष को इस मामले में जरूरी कदम उठाने होंगे। तीन सदस्यीय संयुक्त कमेटी ने एनजीटी से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की सिफारिश की थी। तब तक सीवेज को पाइपलाइन से कनेक्ट कर नजदीक के कार्यशील एसटीपी पर छोड़ने के लिए कहा।
एनजीटी ने प्राधिकरण के जवाब से असहमति जताई है। एडीए पर लगाए 25 लाख रुपये के जुर्माने के आदेश को बहाल रखा है। 11 नवंबर को एडीए उपाध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव नगर विकास और नगर आयुक्त को भी पेश होने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन्हें ऐसी कालोनियों और भवनों का डाटा भी तलब किया है, जहां सीवर की व्यवस्था नहीं है। - डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद्
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