ताजमहल समेत शहर के स्मारकों पर पथकर के रूप में टिकट लगाने वाले आगरा विकास प्राधिकरण ने न केवल इससे मिली रकम का दुरुपयोग किया, बल्कि शासन की अधिसूचना तक को ताक पर रखकर पथकर की वसूली की। एक दिन स्मारकों को पथकर से मुक्त करने की अधिसूचना के उलट एडीए ने ताजमहल पर हर दिन पर्यटकों की जेब तराशी और 14 करोड़ रुपये मुफ्त में ही अपने खजाने में रख लिए।
चार दिसंबर 2000 को शासन ने अधिसूचना जारी कर आगरा के स्मारकों को पथकर से एक दिन मुक्त किया। आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, सिकंदरा, एत्माद्दौला पर तो एडीए ने शुक्रवार को पथकर से मुक्ति दे दी, लेकिन ताजमहल की शुक्रवार को बंदी के बाद किसी अन्य दिन पथकर को मुक्त नहीं किया। 14 साल से एडीए का यह खेल चलता रहा है। इस दौरान प्राधिकरण ने 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त कमाई की है। यही नहीं, प्रदेश सरकार के सचिव जेएस मिश्रा द्वारा 31 दिसंबर 2003 को लिखे गए पत्र में भी एएसआई महानिदेशक को स्पष्ट कहा गया है कि पथकर का टिकट दो दिन के लिए मान्य रहेगा। 500 रुपये के कंपोजिट टिकट पर पर्यटक दो दिन स्मारक देख सकते हैं।
‘पथकर के नाम पर एडीए की खुली लूट है। सरकार, मंत्री, प्रमुख सचिव, अधिसूचना, सभी को एडीए ने ताक पर रख दिया। ताज को केवल कमाई का जरिया माना गया है। एडीए का यह रुख पर्यटन को नुकसान पहुंचाएगा।’
राजीव तिवारी
अध्यक्ष, फेडरेशन आफ ट्रेवल एसोसिएशन
‘हर विदेशी पर्यटक अमीर नहीं होता। महंगी टिकट से पर्यटक रुकने के बाद भी ताज देखने नहीं आता। हमने कई ग्रुप को महंगी टिकट के चलते दशहरा घाट, महताब बाग से ताज दिखाया है। विदेशी पर्यटक मंत्रालयों को महंगी टिकट की कई बार शिकायतें कर चुके हैं।’
शमशुद्दीन
पूर्व अध्यक्ष, एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन
एएसआई ने बंद कर दी थी पथकर टिकट बिक्री
आगरा। साल 2003 में आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा पथकर के रूप में प्रवेश टिकटों की दरें बढ़ाने के खिलाफ एएसआई ने इनकी बिक्री ही रोक दी थी। तत्कालीन एडीए उपाध्यक्ष टीएन सिंह ने एएसआई महानिदेशक को 18 दिसंबर 2003 को पत्र लिखकर टिकट बिकवाने की मांग की गई थी। एएसआई ने 9 दिसंबर से पथकर की टिकटों की बिक्री अपने स्मारकों पर रोक दी थी।
जनता नहीं, एडीए के पिछलग्गू बने सदस्य
आगरा विकास प्राधिकरण में शासन ने तीन गैर सरकारी सदस्यों को नामित किया है, ताकि बोर्ड के फैसलों में जनता का पक्ष भी रखा जा सके। ताजमहल सहित स्मारकों का पथकर बढ़ाने के फैसले पर बोर्ड सदस्यों ने आपत्ति ही नहीं की। बोर्ड सदस्य मदन गर्ग के मुताबिक, पथकर टिकट बढ़ाने के वह विरोधी हैं। उन्होंने बैठक में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर टिकट लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया था।
मंत्रियों से मिलने में आगे, मुद्दों पर चुप संगठन
केंद्र में नई सरकार बनने के बाद सक्रिय हुए तीन संगठनों की चुप्पी अब पर्यटन संगठनों और पर्यटन उद्यमियों को अखर रही है। पूर्व में पर्यटन, संस्कृति और नागरिक उड्डयन मंत्री तक से मिल आए गैर पर्यटन व्यवसायियों द्वारा पथकर मामले पर कोई आपत्ति ही नहीं जताई गई। पर्यटन उद्यमियों में इसे लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि फोटो खिंचवाने के लिए पर्यटन मुद्दे उठाते हैं, लेकिन मुश्किल घड़ी में जनता के बजाय अफसरों के साथ खड़े दिखते हैं।