आगरा। खनन के अवैध परिवहन और भंडारण पर शिकंजा नहीं कस सका। पूर्व डीएम अरविंद बंगारी ने तीन महीने पहले अवैध परिवहन में लिप्त डंपर, ट्रक-ट्रॉलियों व ट्रकों के विरुद्ध अभियान चलाया था। लेकिन सब बेअसर रहा। संयुक्त टीम भी प्रभावी नियंत्रण नहीं लगा सकी।
चंबल में अवैध खनन का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। आदेश पर सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी पिनाहट से धौलपुर तक निरीक्षण कर चुकी है। सीईसी की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। कमेटी ने माना है कि अवैध खनन पर्यावरण और पर्यावास दोनों के लिए खतरा है। इधर, डीएम मनीष बंसल ने निगरानी बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और ड्रोन से सर्वे कराने के आदेश दिए हैं।
इससे पहले तत्कालीन डीएम अरविंद बंगारी ने जनवरी में वन, राजस्व, पुलिस, परिवहन व खनन विभाग की संयुक्त टीमें कार्रवाई के लिए बनाई थीं। पिछले तीन महीने में करीब 400 से अधिक वाहन ओवरलोड व अवैध परिवहन करते पकड़े गए। जब्त वाहनों को पुलिस, खनन निरीक्षक और एडीएम स्तर से मामूली जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया। नतीजा यह हुआ कि अवैध परिवहन फिर शुरू हो गए। जब्त वाहन छूटने के बाद फिर मिट्टी, बालू से लेकर पत्थर तक का परिवहन करने लगे। ऐसे में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।