आगरा में 31 साल पहले ट्रांस यमुना कॉलोनी में घर में घुसकर लूट के मामले में अभियोजन ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार कर आरोप पत्र दाखिल किया, उनकी वादी पहचान तक नहीं कर सका। वादी और एक अन्य गवाह ही कोर्ट में गवाही के लिए पेश किए गए। स्पेशल जज डकैती प्रभावित क्षेत्र डॉक्टर लक्ष्मीकांत राठौर ने पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने के आदेश किए।
एत्माद्दौला की ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी महेंद्र सिंह पुत्र राम भरोसी लाल के घर में पांच जनवरी 1991 की रात को घटना हुई थी। महेंद्र, उनकी मां, भाई और भाभी अपने कमरों में सो रहे थे। रात तकरीबन एक बजे छत के रास्ते से चाकू और तमंचे लेकर पांच बदमाश घर में सीढ़ियों के रास्ते दाखिल हो गए। सबसे पहले महेंद्र की मां को कब्जे में ले लिया। उनका शोर सुनकर वो आए। तीन बदमाशों ने उनकी मां को पकड़ रखा था।
जनवरी 1991 में दर्ज हुआ था मुकदमा
यह देखकर उन्होंने शोर मचाया, लेकिन बदमाशों ने महेंद्र को भी पकड़ लिया। इसके बाद अलमारी की चाबी मांगी। मना करने पर चाकू मारकर घायल कर दिया। बाद में एक बदमाश ने उनकी मां से गहने, रुपये ले लिए। इस दौरान महेंद्र ने कहा कि वह किरायेदार है। मकान मालिक के पास अन्य चाबियां हैं। मामले में छह जनवरी 1991 को मुकदमा दर्ज हुआ।