यमुना एक्सप्रेसवे में दुर्घटना: सांकेतिक तस्वीर
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के ऑडिट का हवाला देते हुए आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) ने मुख्यमंत्री से यमुना एक्सप्रेसवे की सड़क सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।इस पर कहा है कि 2012 से लेकर जून 2018 तक 5189 सड़क हादसों में 746 लोगों की जान जा चुकी है और 8145 घायल हुए हैं। इसके बाद भी आईआईटी के सुझावों को अमल में नहीं लाया जा सका।
एडीएफ के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटी) ने यमुना एक्सप्रेसवे की सड़क सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट 29 अप्रैल 2019 को एक्सप्रेसवे के निर्माणकर्ता जेपी इन्फ्राटेक को दी थी और ये यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (येडा) तक पहुंच चुकी है। सड़क हादसे कम हो इसे लेकर जो प्रवर्तन के लिए पहल की जानी है जिसकी सिफारिशें आईआईटी दिल्ली ने की हैं।
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गति नियंत्रण के लिए मुख्य सिफारिशें
- दो टोल बूथ के बीच में औसत गति की गणना की जाए और जो इसका उल्लंघन करे उस पर जुर्माना लगाया जाए।
- एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह पर गति कैमरे के विषय में लिखा जाए ताकि वाहन चालक के मन में गति उल्लंघन के प्रति जागरूकता और भय दोनों बना रहें।
- ऐसे वाहन जो एक्सप्रेसवे के किनारे रुक जाते हैं उनकी चेकिंग होनी चाहिए।
- टोल बूथ पर प्रतिदिन वाहन चालकों की मदिरापान की चेकिंग होनी चाहिए।
- यातायात नियमों के प्रवर्तन के लिए यह पहल उप्र पुलिस द्वारा की जानी है।
- रात में एक बजे से चार बजे तक वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई जाए।
- घिसे हुए टायरों वाले वाहन प्रतिबंधित हों।
सूचना अधिकार अधिनियम से प्राप्त सूचना के अनुसार अधिक गति वाहनों की संख्या इस प्रकार है
वर्ष अधिक गति वालों वाहनों की संख्या
2012 3,87,601
2013 52,42,055
2014 58,41,658
2015 49,97,875
2016 41,32,240
2017 24,45,113
2018 5,63,799