मथुरा। किशोरवन में आयोजित विद्वत संगोष्ठी को संबोधित करते श्रीराधारमण मंदिर के सेवायत एवं आध्य?
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वृंदावन (मथुरा)। श्री हरिराम व्यास जी महाराज की भजन स्थली किशोरवन में विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए राधारमण मंदिर के सेवायत एवं आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने व्यास जी महाराज की गुरु परंपरा एवं संप्रदाय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीहरिराम व्यास जी हिताचार्य हरिवंश महाप्रभु के शिष्य नहीं थे। ब्रज-वृंदावन में 15वीं शताब्दी के भक्तिकाल युग में निकुंज रसोपासना के लिए समर्पित विभिन्न संप्रदायों आचार्यों में आपसी समझ, तालमेल, एक-दूसरे की भावनाओं को सम्मान देने की एक स्वस्थ परंपरा थीं। आज ऐसा नहीं है।
उन्होंने कहा कि संप्रदाय की आवश्यकता तत्व की समझ को सम्यक रूप से देने के लिए है। संप्रदाय में दीक्षा एक महत्वपूर्ण बात है। असत्य पथ पर अगर हम चलेंगे तो रसोपासना नहीं हो सकती है। रसोपासना एक अमृत सरोवर है। सूरमा कुंज के महंत प्रेमदास शास्त्री ने कहा कि श्रीव्यास जी महाराज द्वारा रचित ‘नवरत्न ग्रंथ’ में अपनी गुरु परंपरा का वर्णन किया गया है।
इस मौके पर संत रामानंद दास, आचार्य श्रीराममूर्ति अग्निहोत्री, डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, डॉ. भागवतकृष्ण नांगिया, डॉ. केशवाचार्य महाराज, जयकिशोर गोस्वामी, आचार्य युगलबिहारी शास्त्री, ब्रजेंद्र मोहन गोस्वामी, उपेंद्र किशोर गोस्वामी, जगदीश शास्त्री, महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल, हेमकिशोर गोस्वामी, चंद्रकिशोर गोस्वामी, हरिकिशोर, अंकित अग्रवाल, हरिदास, रामचंद्र गुप्ता आदि उपस्थित रहे।