कासगंज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बुधवार को रानी लक्ष्मी बाई की जयंती पर श्रीमती शारदा जौहरी महाविद्यालय में मणिकर्णिका सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में उनके जीवन के बारे में जानकारी दी।
मुख्य अतिथि नायब तहसीलदार गरिमा सिंह, मुख्य वक्ता परिषद जिला प्रमुख डॉ. भारती वार्ष्णेय, महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. रानू शर्मा ने रानी लक्ष्मी बाई के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि ने कहा कि भारत के इतिहास में अगर किसी स्त्री ने साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की लौ को अमर कर दिया तो वह हैं झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई। हर महिला उनके जीवन से नई प्रेरणा पाती है।
लक्ष्मी बाई की कहानी सिर्फ तलवार और घोड़े की नहीं, बल्कि उस महिला के जज्बे की है जो अपने अधिकारों की रक्षा, भारत के गौरव और स्वाभिमान को बचाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत से भिड़ गई। अन्याय को चुनौती देकर खुद की पहचान बनाई। मुख्य वक्ता ने कहा कि रानी लक्ष्मी वाई ने अपने जीवन को बंधनों के बजाय स्वतंत्रता की उड़ान दी।
विवाह के बाद वे झांसी की रानी बनीं, लेकिन जब अंग्रेजों ने अन्यायपूर्ण तरीके से झांसी हड़पने की कोशिश की तो एक युवा महिला ने साम्राज्य की नींव हिला देने वाला जवाब दिया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के होने वाले शक्ति चेतना जिला छात्रा सम्मेलन के पोस्टर का विमोचन भी किया गया। इस दौरान विभाग संगठन मंत्री नीरज गोस्वामी, नगर मंत्री कृष्णा माहेश्वरी, संगठन मंत्री ध्रुव गंगवार, विभाग सह संयोजक यश मिश्रा ज्योतिर्मय शर्मा, सोनी स्वामी, अंजलि आदि कार्यकर्ता भी उपस्थित रही ।