घर-स्कूल में एसी, बाहर निकले तो कार में सफर। धूप और सामान्य वातावरण से कम ही वास्ता। धनिक वर्ग परिवारों के बच्चों की यही दिनचर्या। ऐसे में जब भी यह सामान्य वातावरण के संपर्क में आए तो एलर्जी और फिर अस्थमा। एसएन मेडिकल कालेज के बाल रोग और वक्ष एवं क्षय रोग विभाग की स्टडी यही बताती है।
डाक्टरों की मानें तो छह से 14 साल तक के 3 से 4.50 फीसदी बच्चे अस्थमा की चपेट में हैं। इसमें हाई सोसाइटी के परिवार के बच्चों की संख्या करीब 60-75 फीसदी है। वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डा. गजेंद्र विक्रम सिंह बताते हैं कि जो बच्चे सामान्यत: बेहद सुख-सुविधाओं के माहौल में पलते-बढ़ते हैं। वह जब बाहरी वातावरण में पहुंचते हैं तो एलर्जी होने लगती है। बाल रोग विभाग के डा. पंकज का कहना है कि बच्चों में अस्थमा तेजी से बढ़ रहा है। जरूरी है कि बच्चों को सामान्य वातावरण के सीधे संपर्क में भी रखा जाए।
क्या है अस्थमा
सांस की नली से जुड़ी बीमारी है। इसमें एलर्जी होने से सांस नलिकाओं में सूजन आ जाती है। इससे सांस लेने में दिक्कत रहती है। ये अल्प समय तक रहती है, या फिर मौसम बदलने पर परेशान करती है। डाक्टर कहते हैं कि बिना दवाओं के भी एक समय तक ये ठीक हो जाती है, फिर भी डाक्टरी परामर्श पर इलाज कराएं।
ये हैं लक्षण:
रात-सुबह खांसी रहना, खासतौर से सूखी
सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ
सांस लेते वक्त सीटी की आवाज निकलना
चलने पर हांफना, जल्दी थकावट होना