बटेश्वर 101 मंदिर श्रखला का फोटो ( सोमवती अमावस्या पर उमड़ेगी भीड़ )
- फोटो : Samvad
बाह। सोमवती अमावस्या पर सोमवार को 30 साल बाद मृगशिरा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग की त्रिवेणी बन रही है। सोमवती अमावस्या के दिन पूजा-पाठ, दान और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि रविवार रात 12.20 बजे से सोमवार सुबह 8.24 बजे तक अमावस्या की तिथि है। इससे पहले 1996 में 18 जुलाई को ऐसा संयोग पुरषोत्तम मास में बना था। उन्होंने बताया कि शिव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलती है। सोमवती अमावस्या पर स्नान, दान, पितृ तर्पण का विशेष पुण्यफल प्राप्त होगा। मान्यता है कि पीपल वृक्ष की पूजा और उसकी परिक्रमा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है तथा दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। सुहागिन महिलाएं पीपल और बरगद के वृक्ष की पूजा तथा परिक्रमा करेंगी। मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर बटेश्वर के विभिन्न शिव मंदिरों में काल सर्प दोष, पितृ दोष से मुक्ति एवं सुख समृद्धि के लिए विशेष अनुष्ठान होंगे।
इधर, उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल बटेश्वर में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर्व पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ेगा। इस पावन अवसर पर दूर-दराज के शहरों और ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है। तीर्थ क्षेत्र में यमुना किनारे बने विभिन्न घाटों पर सुबह से ही स्नान का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जिसके बाद मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलेगा। पर्व को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं। क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूर्वी सर्किल के अधिकांश थानों का पुलिस बल तैनात रहेगा। यमुना घाटों पर सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय गोताखोरों के साथ-साथ पीएसी के गोताखोर मोटर बोट के साथ मुस्तैद रहेंगे।