आगरा। मुहर्रम की दसवीं तारीख पर शुक्रवार को इमामबाड़ों में सजाए गए ताजियों को कर्बलाओं में सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए सबसे पहले पाय चौकी (कटरा दबकैय्यान) स्थित इमामबाड़े से ऐतिहासिक फूलों के ताजिये को उठाया गया। इसके बाद शहरभर में रखे गए ताजियों के जुलूस शुरू हुए। नौजवानों ने जुलूसों में करतब दिखाए। कांच की रोड फोड़ीं और तलवारबाजी व पटेबाजी की। तिरंगे और इस्लामिक झंडे हाथों में लिए नौजवान इमाम हुसैन की शहादत को याद करते नजर आए। शिया समुदाय का रवायती जुलूस शाहगंज के पुराने इमामबाड़े से शुरू हुआ, जिसमें सीनाजनी के बाद जंजीर व कमां का मातम करके नौजवानों ने खुद को लहूलुहान कर लिया। इसके बाद न्यू आगरा, सराय ख्वाजा, पक्की सराय सहित अन्य कर्बलाओं में ताजियों को दफनाया गया। शरबत की प्याऊ लगाईं गईं तो कहीं कबूली खिचड़ी बांटी गई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
पाय चौकी स्थित ऐतिहासिक फूलों का ताजिए को 324 साल से निकाला जाता रहा है। फूलों के ताजिए का जुलूस चौधरी सरफराज खान की सदारत में शुरू हुआ। इसके बाद लोहामंडी, शहीद नगर, आगरा कैंट, नई बस्ती, सदर, बालूगंज, ताजगंज, नाई की मंडी, कटरा मदारी खां, हीग की मंडी, मंटोला, घाटी, मामू-भांजा, लोहामंडी और विभिन्न इलाकों से ताजियों के जुलूस निकाले गए। भीषण गर्मी के बाद भी मुस्लिमों का जोश देखने लायक था। जुलूसों में शरीक लोग तलवारबाजी, पटेबाजी और अन्य करतब करते चल रहे थे। जुलूसों में तिरंगों के साथ ही इस्लामिक ध्वज लेकर भी युवा चल रहे थे। दोपहर दो बजे से जुलूसों का न्यू आगरा कर्बला, सराय ख्वाजा कर्बलाओं में पहुंचना शुरू हो गया। इसके बाद कर्बलाओं में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक करने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। न्यू आगरा कर्बला में ताजियेदारों का पगड़ी बांधकर इस्तकबाल भी किया गया। मुहर्रम पर ऑल इंडिया मुस्लिम इत्तेहाद कमेटी की ओर से शाहगंज स्थित रूई की मंडी से ताजियेदारी जुलूस निकाला गया। संचालन निसार अहमद ने किया।
तोड़ीं ट्यूबलाइटें, लहराए हथियार
अखाड़ों के कलाकारों ने तलवारबाजी और अन्य पारंपरिक युद्धक कलाओं का प्रदर्शन किया। कई जगह नौजवानों ने तलवार, छुरे जैसे हथियार लहराए। वहीं कई स्थानों पर कांच की ट्यूबलाइटें फोड़ने पर पुलिस ने नौजवानों को रोका। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो भी बनाए।
कर्बला पर बांटा शरबत, कबूली खिचड़ी
आगरा। न्यू आगरा कर्बला पर मुहीम खान, आशू सिद्दीकी ने शरबत और कबूली खिचड़ी बांटकर अकीदतमंदों को शीतल जल मुहैया कराया। इस कैंप का उद्घाटन सपा के महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने किया। इसके बाद मुस्लिम समाज की ओर से सपा नेता का पगड़ी बांधकर इस्तकबाल किया गया। इसी तरह मुस्लिम महापंचायत और इस्लामिया लोकल एजेंसी की तरफ से मंटोला में शरबत बांटा गया। अमजद कुरैशी और नदीम नूर साथियों के साथ मौजूद रहे। अस्पताल रोड पर ताजियेदारों का स्वागत समी आगाई, इरफान सलीम, सिराज कुरैशी, अदनान कुरैशी, शरीफ काले आदि ने किया।
आज शब्बीर पे क्या आलम-ए-तन्हाई है....
आगरा। अंजुमन-ए-पंजतनी शाहगंज, की ओर से पुराने इमामबाड़े से अलम और ताजियों का जुलूस शुरू किया गया। शुरुआत मीर अनीस के मर्सिए आज शब्बीर पे क्या आलम-ए-तन्हाई है...से हुई। इसे हसन मेहंदी, सुहेल जाफरी व अली मंजर जाफरी ने पेश किया। इसके बाद मेरे गरीब हुसैन, कर्बला के जंगल में शाह का घराना है...जैसे नौैहों पर मातम किया गया। जुलूस में शामिल नौजवानों ने नंगे पैर अपने जिस्मों को जंजीर और कमां का मातम करके लहूलुहान किया तो हर आंख नम हो गई। या हुसैन या हुसैन की सदाओं से माहौल गमजदा हो उठा। हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जांबाजों की याद में आंसू छलकने लगे। जुलूस अपने परंपरागत रास्तों से होकर सराय ख्वाजा कर्बला में पहुंचा, जहां सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान एड. अमीर अहमद , बशारत अली,अब्बास अमीर जाफरी,हसन अख्तर, गजनफर रिजवी, नौशद हुसैन, नौहाख्वानी की। अंजुमन-ए-पंजतनी अध्यक्ष हुसैन मेहदी कौनेन, अमीर जाफरी, अली हैदर जाफरी आदि मौजूद रहे।