आगरा। छावनी स्टेशन पर बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए अब परेशान नहीं होना होगा। रेलवे जल्द ही यहां पर बैटरी चलित कार्ट शुरू करने जा रहा है।
बता दें कि रेल बजट में देश के प्रमुख स्टेशनों पर बैटरी चलित कार्ट चलाने की घोषणा रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने की है, जिससे बीमार, कमजोर और बुजुर्ग यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाने के लिए लंबे ब्रिज न पार करने पड़े। बैटरी चलित कार्ट 24 घंटे स्टेशन पर उपलब्ध रहेगे।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार निजी संस्थाओं को कार्ट चलाने के लिए आकर्षित किया जा रहा है। अनुमान के मुताबिक एक कार्ट पर लगभग डेढ़ से दो लाख रुपए के खर्च हो सकते है। इसकी भरपाई संस्थाएं इन गाड़ियों में विज्ञापन के माध्यम से कर सकेंगी।
पहले भी हुई थी घोषणा
हालांकि कैंट स्टेशन पर बैटरी चलित कार्ट चलाने के लिए पिछले बजट में भी घोषणा की गई थी, लेकिन यह घोषणा आज तक मूर्त रूप नहीं ले सकी। इस बार उम्मीदें ज्यादा है।
बैटरी चलित कार्ट चलाने के लिए निजी संस्थाओं से संपर्क किया जा रहा है। जैसे ही प्रायोजक मिलते हैं, इन्हें चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। -भूपिंदर ढिल्लन, जनसंपर्क अधिकारी आगरा मंडल।
रेलवे ने शुरू की तैयारी, निजी सहयोग से चलेगी गाड़ियां
स्टेशन पर बुजुर्गों और बीमार यात्रियों को मिलेगी राहत
आगरा। छावनी स्टेशन पर बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए अब परेशान नहीं होना होगा। रेलवे जल्द ही यहां पर बैटरी चलित कार्ट शुरू करने जा रहा है।
बता दें कि रेल बजट में देश के प्रमुख स्टेशनों पर बैटरी चलित कार्ट चलाने की घोषणा रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने की है, जिससे बीमार, कमजोर और बुजुर्ग यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाने के लिए लंबे ब्रिज न पार करने पड़े। बैटरी चलित कार्ट 24 घंटे स्टेशन पर उपलब्ध रहेगे।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार निजी संस्थाओं को कार्ट चलाने के लिए आकर्षित किया जा रहा है। अनुमान के मुताबिक एक कार्ट पर लगभग डेढ़ से दो लाख रुपए के खर्च हो सकते है। इसकी भरपाई संस्थाएं इन गाड़ियों में विज्ञापन के माध्यम से कर सकेंगी।
पहले भी हुई थी घोषणा
हालांकि कैंट स्टेशन पर बैटरी चलित कार्ट चलाने के लिए पिछले बजट में भी घोषणा की गई थी, लेकिन यह घोषणा आज तक मूर्त रूप नहीं ले सकी। इस बार उम्मीदें ज्यादा है।
बैटरी चलित कार्ट चलाने के लिए निजी संस्थाओं से संपर्क किया जा रहा है। जैसे ही प्रायोजक मिलते हैं, इन्हें चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। -भूपिंदर ढिल्लन, जनसंपर्क अधिकारी आगरा मंडल।