आगरा। पुलिस हिरासत में जहर खाने वाले संजू जोशी की अस्पताल में तीन दिन बाद मौत हो गई। उसे चांदी कारोबारी अपने चाचा पर कातिलाना हमले और लूट के प्रयास के आरोप में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। संजू की मौत के बाद पुलिस ने घरवालों को शव लेने के लिए बुलाया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। कई घंटे तक समझाने के बाद भी जब बात नहीं बनी तो शव को मोर्चरी में रखवा दिया।
नौ मई की शाम को जोशियान मोहल्ला निवासी चांदी कारोबारी सुभाषचंद्र और उनके बेटे विकास उर्फ नंदू पर बदमाशों ने गोलियां बरसाकर लूट का प्रयास किया था। विकास की मौत हो गई, जबकि सुभाष घायल हुए थे। सुभाष के होश में आने पर पूछताछ के बाद पुलिस ने तड़के तीन बजे उनके भतीजे संजू जोशी (32) पुत्र कैलाश चंद्र को हिरासत में लिया था। एक घंटे बाद ही हिरासत के दौरान हालत बिगड़ने पर पुलिस ने घरवालों को बताया था कि उसने सोडियम साइनाइड खा लिया है। बाद में वह हिरासत में लेने से मुकरने लगी थी। यह अलग बात है कि पुलिस ही अस्पताल में उसका इलाज करा रही थी। बुधवार तकरीबन 12 बजे संजू की इलाज के दौरान मौत हो गई।
एएसपी हरीपर्वत समीर सौरभ, इंस्पेक्टर हरीपर्वत समेत थाने की फोर्स और महिला पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने संजू के घरवालों को शव को सुपुर्दगी में लेने को कहा मगर उन्होंने साफ इनकार कर दिया।
संजू के घरवालों का कहना है कि संजू को पुलिस घर से उठाकर ले गई थी, तब वह पूरी तरह ठीक था। अब पुलिस उसे हिरासत में लेने की बात से ही इनकार कर रही है। वह किसी कीमत पर शव लेने नहीं जाएंगे। इसके बाद एमएम गेट और लोहामंडी पुलिस संजू के घर पहुंची। घरवालों से शव लेने को कहा, लेकिन भीड़ का गुस्सा देख पुलिस उल्टे पांव लौट गई। तीन घंटे बाद पुलिस ने वहां मौजूद पांच लोगों को गवाह बनाकर पंचायतनामा भरा और शव को मोर्चरी में रखवा दिया। वहीं एसएसपी शलभ माथुर का कहना है कि संजू ने घर में ही जहर खा लिया था।
‘पुलिस ने मेरे भाई की हत्या की’
संजू की मौत की खबर मिलने पर घर में कोहराम मच गया। संजू की बहन अंजू चीख-चीखकर कह रही थी कि पुलिस ने संजू पर एक अपराधी के कहने पर कलंक लगा दिया। क्या इस कलंक को धो पाएगी पुलिस? दो परिवारों में फूट डलवाने का काम किया है। पुलिस ने उसकी हत्या की है। पुलिसवाले उसे रात तीन बजे घर से उठाकर ले गए थे। फिर कैसे कह रहे हैं कि हिरासत में नहीं लिया। घरवालों का कहना था कि बबलू पुलिस का मुखबिर है। उसी के कहने पर संजू को फंसाया गया। पुलिस संजू को वापस करना चाहती है तो जैसा ले गई थी, वैसा लौटा दे। अंजू का कहना था कि अब संजू के बीवी-बच्चों का पालन पोषण कौन करेगा? एक परिवार बदमाशों ने बर्बाद कर दिया तो दूसरे को पुलिस ने कहीं का नहीं छोड़ा।
पिता हुए बेहोश, पत्नी सदमे में
संजू के पिता कैलाशचंद्र बेटे की मौत की खबर सुनकर बेहोश हो गए। उन्हें लोगों ने किसी तरह होश में लाया। वह दिल के रोगी हैं। मां मालती का कहना था कि दो लाल चले गए, अब तो जिंदा रहकर भी मुर्दा हैं। हमसे मत पूछो। संजू के दो बच्चे तीन साल का प्रिंस और दो साल का बाबू है। पत्नी रोशनी गर्भवती है। पति की मौत की खबर सुनकर वह सदमे में है।
परिवारों के बीच पुलिस ने शक की खाई भी खोद
सुभाषचंद्र और कैलाश दोनों भाई हैं। उनके घर भी बराबर में हैं। नौ मई को बदमाशों ने सुभाष के बेटे विकास उर्फ नंदू की गोली मारकर हत्या कर दी। सुभाषचंद्र अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें यह भी नहीं मालूम कि अब उनका बेटा इस दुनिया में नहीं है। घरवालों का कहना है कि वे दिल के रोगी हैं। उन्हें घर लाने पर भी विकास की मौत के बारे में जानकारी नहीं दी जाएगी। इसी कांड ने जवान भतीजे संजू की भी जान ले ली। पांच दिन में दो की मौत हो गईं। घर में कोहराम मचा हुआ है। दोनों परिवारों के बीच पुलिस ने शक की खाई भी खोद दी। संजू के घरवालों का दर्द है कि बेटे पर पुलिस ने कलंक लगा दिया।
‘सोडियम साइनाइड व्यक्ति के शरीर में मौजूद खून में से ऑक्सीहीमोग्लोबिन (आक्सीजन) को खत्म कर देता है जिससे उसकी मौत हो जाती है।’
- डा. गौतम जैसवार एसोसिएट प्रोफेसर, इंस्टीट्यूट आफ बेसिक साइंस खंदारी