आगरा। विकास के मामले में भले ही पश्चिमी देश भारत से मीलों आगे हों मगर अपनी धरोहरों संभालने में वह भारत से काफी पीछे हैं। सभ्यता के प्रतीक विश्वदाय स्मारक ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुरसीकरी में विजुअल इंटीग्रिटी को लेकर कराए गए कार्य जहां दुनियाभर के विशेषज्ञों के सामने नजीर हैं, वहीं विदेशों में कई विश्वदाय स्मारक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
विजुअल इंटीग्रिटी पर आयोजित वर्ल्ड हेरिटेज एक्सपर्ट्स मीट में यह सामने आया कि अमेरिका, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, अरब देशों में विजुअल इंटीग्रिटी से प्रभावित विश्वदाय स्मारकों की संख्या कई गुना ज्यादा है। मीट में दुनिया के 41 विश्वदाय स्मारकों में विजुअल इंटीग्रिटी को लेकर चर्चा की गई। अकेले 25 यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में हैं। आठ एशिया पैसिफिक , चार अरब में, दो अफ्रीका और दो लैटिन अमेरिका में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर स्मारक विकास की रफ्तार से अपने वजूद को बचाने के लिए लड़ रहे हैं।
सेमिनार में जिन पांच स्मारकों को खतरे में दर्शाया हैं, उनमें भारत का एकमात्र हंपी के स्मारक हैं।
जिन स्मारकों में विजुअल इंटीग्रिटी को लेकर खतरा हो सकता है उनमें टावर आफ लंदन, मैदान इमाम इसफाहन, हिस्टोरिक सेंटर आफ रीगा और फ्रांस का पोर्ट आफ मून शामिल हैं।
दो दिन मंथन में बनी सहमति
आगरा। विजुअल इंटीग्रिटी एक्सपर्ट्स मीट में दुनियाभर के विशेषज्ञों ने भारतीय पुरा विशेषज्ञों के साथ मंथन करके मसौदे का स्वरूप तैयार किया है। इसके पूर्व वर्किंग ग्रुप पर कई घंटे तक चर्चा हुई। मंथन के बाद कुछ बिंदुओं पर आम सहमति बनी है। विजुअल इंटीग्रिटी के खतरे से स्मारकों को बचाने के लिए लोगों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अभी तक किए गए प्रयासों को दिशा देने को अगली बैठक में चर्चा पर सहमति बनी। यूनेस्को के स्थायी प्रतिनिधि विनयशील ओबेराय ने इसे आगे ले जाने की बात कही। शनिवार को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी के सदस्य और विदेशी प्रतिनिधि ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुरसीकरी पर कराए गए कार्यों को परखेंगे।