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विदेशों के 100 से अधिक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही हिंदी

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रैना पालीवाल
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आगरा। ग्लोबलाइजेशन ने हिंदी के लिये सात समंदर पार के द्वार खोल दिए हैं। हिंदी की शान अब परदेस में परचम फहरा रही है। इस जुबान को होठों पर लाने के लिए विदेशी लालायित हैं। न सिर्फ एशियन बल्कि यूरोपियन देशों में भी हिंदी की जड़ें गहरा रही हैं। पिछले दिनों जोहानिसबर्ग में हुए नौवें हिंदी सम्मेलन में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा के रूप में स्वीकृति दिलाने का संकल्प लिया गया था।
केंहिंसं के सूचना व प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष प्रो. देवेंद्र शुक्ल ने सम्मेलन में संस्थान का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने बताया कि बाजार ने हिंदी को ग्लोबल बना दिया है। 20 वीं शताब्दी से आर्थिक शक्तियों के रूप में सामने आए भारत और चाइना से एशिया का प्रभुत्व बढ़ रहा है। यूरोपियन देश और अमेरिका ऐसा नहीं चाहते लेकिन वे भी हिंदी की अनदेखी नहीं कर पा रहे। भारतीय भाषा सबको जोड़ रही है। दक्षिण अमेरिका, यूरोप में भारतीय मूल के लोग बढ़ते जा रहे हैं। इस वजह से भी हिंदी लोकप्रिय हो रही है। नार्वे, बुल्गारिया, टर्की, रूमानिया, बोन विश्वविद्यालय जर्मनी, हॉलैंड, सूरीनाम, फिजी, मॉरीशस से हिंदी पत्रिकाएं निकल रही हैं। बीजिंग, चाइना, हॉलैंड आदि 100 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। वर्तमान में 34 देशों के 100 छात्र केंहिंसं में हिंदी सीख रहे हैं।
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इन देशों में हिंदी का क्रेज: बुल्गारिया, हंगरी, टर्की, हॉलैंड, चाइना, श्रीलंका, रूस, अफगानिस्तान, साउथ अमेरिका, साउथ कोरिया, त्रिनिडाड आदि। इस बार केंहिंसं में पहली बार स्विटजरलैंड से एक छात्र हिंदी सीखने आया है। अफ्रीकी देशों में भी हिंदी लोकप्रिय हो रही है।

प्रवासी भारतीयों की अस्मिता है हिंदी
ब्रिटिश काल में भारत से कुछ लोग गिरमिटिया मजदूर के रूप में फिजी, मॉरीशस और त्रिनिडाड गए। ये अपने साथ रामायण और गीता लेकर गए जिसने हिंदी और भारतीय संस्कृति का प्रचार किया। अब यही हिंदी प्रवासी भारतीयों की अस्मिता बन गई है।


60 के दशक से विदेशियों को हिंदी सिखा रहा केंहिंसं
19 मार्च 1960 को भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा व समाज कल्याण मंत्रालय ने पंजीकृत संस्था केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल का गठन किया। इसको अखिल भारतीय हिंदी महाविद्यालय के संचालन का दायित्व सौंपा गया। 1 जनवरी 1963 को इसका नाम केंद्रीय हिंदी शिक्षक महाविद्यालय रखा और इसी साल 21 अक्टूबर को नाम बदलकर केंद्रीय हिंदी संस्थान कर दिया गया।
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मुख्यालय आगरा, पांच केंद्र दिल्ली, हैदराबाद, गुवाहाटी, शिलांग व मैसूर
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के पाठ्यक्रम
हिंदी भाषा प्रमाण पत्र (100)
हिंदी भाषा दक्षता प्रमाण पत्र (200)
हिंदी उच्च दक्षता प्रमाण पत्र (300)
स्नातकोत्तर शोध डिप्लोमा (400)

2006 का
आगरा। विदेश मंत्रालय ने 10 जनवरी को 2006 विश्व हिंदी दिवस घोषित किया था। 2007 में पहली बार प्रवासी भारतीयों के लिए प्रवासी हिंदी दिवस विज्ञान भवन में मनाया गया। 8 जनवरी से तीन दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। 10 जनवरी 1975 को ही नागुपर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन हुआ था।
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