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हैडिंग : यूं सुरक्षित नहीं है बेटियां

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हाइकोर्ट ने संज्ञान में लिया है कि यूपी में बेटियां घर से निकलने में डरती हैं। डरे भी क्यों नहीं, यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमंते तत्र देवता की संस्कृति वाले उत्तर प्रदेश में बेटियों के प्रति जितने अपराध के मामले बढ़े हैं उतना ही पुलिस महकमे की उनके प्रति संवेदनशीलता में कमी आई है। महिला थाना दंपतियों के लिए पंचायत घर बन गया तो हेल्पलाइन हेल्पलेस हो गई। स्कूल जाने वाली छात्राएं हों या फिर कामकाजी युवतियां अकसर ही उन्हें शोहदों की हरकतों से दो-चार होना पड़ रहा है। पुलिस या तो सुन नहीं रही, सुन रही तो कार्रवाई नहीं हो रही है। यानी शोहदों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। कार्रवाई नहीं होने की पीड़ा, लोक-लाज का भय और परिजनों का दबाव लड़कियों को ऐसे मामले इग्नोर करने पर मजबूर कर रहा है। लड़कियों के साथ घटनाएं बता रहीं हैं कि मर्ज का इलाज ऐसा हो रहा है कि मर्ज ही बढ़ रहा है।
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आगरा। आगरा ही नहीं पूरा जोन भी बेटियों के लिए महफूज नहीं है। यहां हर दो दिन में तीन महिलाओं के साथ वारदात की गई। यह कोई और नहीं पुलिस के आंकडे़ बता रहे हैं। विश्व विख्यात ताजनगरी की ही केवल बात करें तो इस साल 15 सितंबर तक 411 महिलाओं को बदमाशों ने अपना निशाना बनाया। इनमें सबसे अधिक वारदातें अपहरण की हुईं। जोन में छेड़खानी की सबसे अधिक वारदात आगरा में हुई हैं। इसके अलावा अपहरण, शीलभंग, बलात्कार के भी सबसे अधिक मामले यहीं हुए हैं।

रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद बढ़ी मुसीबत
ट्रांस यमुना कालोनी की हाईस्कूल में पढ़ने वाली मोनिका (बदला नाम) पड़ोसी युवक की छेड़खानी से इतनी तंग आ गई कि उसने कालेज जाना बंद कर दिया। परिजनों ने आरोपी के खिलाफ थाना एत्माद्दौला में मुकदमा दर्ज क्या कराया मानो पूरे परिवार की शामत आ गई। शोहदे ने तेजाब डालने की धमकी दे दी। एसपी सिटी तक शिकायत पहुंची मगर आरोपी खुलेआम घूम रहा है। घरवाले अब ये सोचने पर मजबूर हैं कि रिपोर्ट दर्ज कराने से क्या फायदा हुआ? कार्रवाई के बारे में पूछने पर एसओ जेएन अस्थाना का कहना था कि सात साल से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी नहीं होती। व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते हुए शोहदा खुलेआम घूम रहा है और पीड़ित छात्रा की दहशत बढ़ती जा रही है।
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अपहरण में जबरन कराया समझौता
शास्त्रीपुरम की राखी (बदला नाम) महज 12 साल की है। पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। तीन सितंबर को घर से स्कूल जाने को निकली थी। आटो चालक उसे जबरन उठाकर ले गया। किसी तरह लोगों ने उसे चालक के चंगुल से बचा लिया। मामले थाने पहुंचा। सिकंदरा पुलिस की कार्रवाई बानगी है। उसने परिजनों को बदनामी का डर दिखाकर दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। यानी आटो चालक खुलेआम घूम रहा है और लड़की अपने डरे परिजनों को देखकर डर में जी रही है।

‘हेल्पलेस’ हेल्पलाइन
शहर में छेड़खानी की बढ़ती घटनाओं के बाद छात्राओं की शिकायतें दर्ज कराने के लिए चार साल पूर्व महिला थाने में हेल्पलाइन की शुरुआत की गई। यहां वह कॉल करके अपनी समस्या बता सकती हैं। रांग फोन काल्स से छेड़खानी करने वालों को भी सबक सिखाने का जिम्मा हेल्प लाइन के पास था। लेकिन हेल्प लाइन कुछ समय बाद ही बंद हो गई। इसका जिम्मेदार कौन है, यह तय ही नहीं किया गया और हेल्प लाइन नंबर महिला थाने का डॉट फोन बन गया है।
महिला थाना बना दंपतियों का पंचायत घर
वैसे तो लड़कियां छेड़खानी की शिकायत लेकर महिला थाने यदा-कदा ही आती हैं। कभी कभार आ भी गई तो उसे संबंधित थाने जाने की कहकर टरका दिया जाता है। कहा जाता है कि यहां केवल पति-पत्नियों के झगड़े निपटाए जाते हैं। छेड़खानी की शिकायतों पर महिला थाने का रवैया भी हिटलरशाही है। जब इस बाबत एसओ महिला थाना उपासना सिंह यादव से पूछा गया तो उनका कहना था कि मुझे तो नहीं मालूम हेल्प लाइन थाने में है या नहीं, लेकिन छेड़खानी की शिकायतें हमारे पास आती भी हैं तो संबंधित थाने को रेफर कर दी जाती हैं।

बस गश्ती भर रह गईं ‘महिला कोबरा’
तत्कालीन डीआईजी असीम अरुण ने खासतौर से बाजारों और स्कूल-कालेजों के आसपास होने वाली छेड़खानी की घटनाओं को रोकने के लिए इन स्थानों पर महिला पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिलवाया था। इसके बाद आधा दर्जन महिला पुलिसकर्मियों को स्कूटी (एक्टिवा आदि) विभाग द्वारा दी गईं। इन महिला पुलिसकर्मियों को सुबह-शाम बाजारों और स्कूल कालेजों के आसपास गश्त करनी थी और शोहदों की हरकतों पर नजर रखनी थी। लेकिन वक्त के साथ यह महिला कोबरा व्यवस्था भी ठप हो चुकी है। अब यह स्कूटी सवार महिला पुलिसकर्मी गश्त के नाम पर खानापूर्ति करती हैं।
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महिलाओं से वारदातें
जिला चेन स्नेचिंग अपहरण छेड़खानी शीलभंग हत्या बलात्कार
आगरा 45 167 43 100 25 31
मथुरा 09 87 22 41 15 14
मैनपुरी 01 79 13 41 13 10
फीरोजाबाद 05 102 10 28 21 19
एटा 09 73 07 39 06 13
कासगंज 03 45 02 24 07 09
अलीगढ़ 14 185 22 76 19 37
हाथरस 00 28 08 22 11 08


जिला दहेज हत्या महिला उत्पीड़न
आगरा 55 218
मथुरा 24 157
मैनपुरी 27 57
फीरोजाबाद 34 57
एटा 29 52
कासगंज 16 13
अलीगढ़ 41 169
हाथरस 11 10
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