आगरा। रोडवेज परिचालकों की भर्ती में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। रोडवेज निगम पिछले डेढ़ सालों से पीआरडी डिपार्टमेंट को उन परिचालकों के लिए लाखों रुपए भुगतान करता रहा है जो पंजीकृत ही नहीं है। सूचना के अधिकार में जिला युवा कल्याण अधिकारी और प्रांतीय रक्षक दल फर्रुखाबाद से मांगी गई सूचना के बाद आरएम आगरा को इस आशय का पत्र भेजा गया है कि परिचालकों का वेतन रोक दिया जाए क्योंकि यह बात संज्ञान में आ चुकी है कि सूची के अधिकांश नाम पीआरडी स्वयंसेवकों के नहीं है।
आगरा परिक्षेत्र में परिचालकों की भर्ती में जमकर घोटाला हुआ है। आगरा परिक्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2010-11 में 64 संविदा परिचालकों की नियुक्ति की गई थी। संविदा परचालकों की नियुक्ति पीआरडी स्वयंसेवकों में से होनी थी। लेकिन अब खुलासा हो रहा है कि रोडवेज के अधिकारियों ने जिन्हें संविदा परिचालक के रूप में नियुक्ति दी गई उनमें से अधिकांश पीआरडी के स्वयंसेवक नहीं है।
मामले को लेकर अजय अग्रवाल ने जन सूचना के तहत फर्रुखाबाद के युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास अधिकारी से जानकारी मांगी थी। पत्र के माध्यम से बताया गया है कि जिन जवानों की भर्ती आगरा परिक्षेत्र ने की है, वे फर्रुखाबाद प्रांतीय रक्षक दल के सदस्य नहीं हैं। जबकि नियमानुसार उन्हीं की भर्ती हो सकती है, जो पीआरडी के सदस्य होंगे। लेकिन नियमों को दरकिनार करते हुए भर्ती की गई और पिछले डेढ़ सालों में करीब एक करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया।
फर्रुखाबाद के पीआरडी जवानों के नाम पर जिन परिचालकों की भर्ती की गई है वह पूरी तरह से फर्जी है। उन्हें तत्काल हटाया जाए। मेरे कार्यालय से आगरा के किसी भी जवान को वेतन नहीं दिया जा रहा है। कानपुर क्षेत्र से फर्रुखाबाद के पीआरडी जवानों के नाम से की गई भर्ती रद कर दी गई है। पूर्व में जो अधिकारी थे, उन्होंने कार्यालय में ऐसा कोई सबूत नहीं छोड़ा, जिससे पता चल सके किन जवानों की कहां-कहां भर्ती की गई।
अरविंद कुमार कुशवाहा
युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास अधिकारी, फर्रुखाबाद
सभी परिचालकों का सत्यापन करने के लिए फर्रुखाबाद भेजा था। वहां से सत्यापित होने के बाद ही भर्ती की गई। अगर ये पीआरडी जवान उनके सदस्य नहीं थे, तो हम जो वेतन भेज रहे हैं वह बांटा क्यों गया। इसके अलावा उन्हें एक साल बाद ये बात क्यों याद आई है।
नीरज सक्सेना
क्षेत्रीय प्रबंधक आगरा परिक्षेत्र