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हत्या में दो नामजद, एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा

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राया (मथुरा)। रविवार देर शाम गोली मारकर की गई दवा विक्रेता की हत्या के बाद गांव में तनाव है। मृतक के भाई ने गांव के दो लोगों के खिलाफ नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। लेकिन फिलहाल पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच पाई है।
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रविवार की शाम गांव पोलुआ राया निवासी सहदेव की सादाबाद रोड खजूरी और मदैम के बीच में बाइक सवारों ने गोली मार हत्या कर दी थी। मृतक के भाई महीपाल सिंह ने थाना राया में गांव के बंटी और चंद्रगिराम के खिलाफ थाना राया में मुकदमा दर्ज कराया है।

मृतक के ताऊ ने बताया कि करीब पंद्रह दिन पूर्व में रामपुर चौराहे पर स्थित मेडिकल स्टोर पर बंटी आया था, वहां सहदेव और बंटी में कहासुनी हो गई थी। बंटी ने मारपीट करने की कोशिश भी की थी। आरोप है कि रविवार को सहदेव को अकेला पाकर उसकी गोली मार हत्या कर दी। उधर, घटना के बाद से गांव में तनाव है। पुलिस फोर्स तैनात है। पुलिस ने आरोपी के भाई सहित कई लोगों से पूछताछ की लेकिन सफलता नहीं मिल सकी है।
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शिशुपाल की हत्या से गांव खरवा में भी तनाव
राया। रविवार को खरवा में हुईं हत्या की घटना के बाद गांव में तनाव है। रविवार को गांव खरवा निवासी शिशुपाल सिंह अपने नीवगांव रोड पर स्थित शिवधाम कालोनी में प्लॉट पर बैठा था तभी गांव के ही जितेंद्र और कलुआ निवासीगण गांव खरवा ने शिशुपाल पर हमला कर उसे घायल कर दिया था जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक के भाई देवेेंद्र सिंह ने घटना की रिपोर्ट दर्ज करा दी है।

आरोप: पुलिस की ढिलाई से चली गई दोनों की जान
राया। पोलुआ और खरवा गांव में हुईं दो हत्याओं से पुलिस पर ढिलाई बरतने का भी आरोप लग रहा है। कहा जा रहा है कि इन दोनों घटनाओं में पूर्व में झगड़े की शिकायत होने पर पुलिस सजग रहती तो दोनों लोगों की जान बच सकती थी। लोगों का कहना है कि 15 दिन पूर्व खरवा निवासी शिशुपाल का आरोपी जितेंद्र और कलुआ से विवाद हुआ था उसके बाद दोनों पक्ष थाने भी आए थे लेकिन पुलिस ने मामला हल्के में लेकर टाल दिया। इसी का नतीजा रहा है कि शिशुपाल की हत्या कर दी गई। ऐसा ही पोलुआ निवासी दवा विक्रेता सहदेव के साथ हुआ। यहां भी पिछले दिनों सहदेव का बंटी और चंद्रगिराम से झगड़ा हुआ था। लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। वहीं, हत्या की वारदातों के बाद भी पुलिस के देरी से पहुंचने को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि आला अफसरों तक भी शिकायतें पहुंची थीं लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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