एटा। डिजिटल इंडिया के दौर में डिजिटल होते चुनाव आयोग का रंग अब प्रत्याशियों पर भी चढ़ रहा है। चुनाव मैदान में सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए प्रत्याशी आईटी और अल्फाज के महारथियों की खोज में हैं। इसके लिए फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम जैसी सोशल साइट्स को अच्छे से जानने वाले के साथ ही समय समय पर किस तरह से टिप्पणी की जानी है, ऐसे विशेषज्ञों को खोजा रहा है।
बदलते दौर में डिजिटल होते देश में चुनाव भी डिजिटल होने की राह पर बढ़ रहा है। चुनाव आयोग ने चार एप जारी करके मतदाताओं को सहूलियत दी है। अब जब चुनाव आयोग और मतदाता हाईटेक हो रहे हैं, तो प्रत्याशी क्यों पीछे रहें? ऐसे में प्रत्याशियों ने चुनाव में हाईटेक रास्ता अख्तियार किया। प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया के जरिए प्रचार करने के लिए मोबाइल प्रचार कंपनियों और एजेंसियों को हायर किया है। साथ ही कंपनियों को सोशल मीडिया ग्रुप में भी मेसेज पोस्ट करने का जिम्मा सौंपा गया है। कई प्रत्याशियों द्वारा अच्छी पोस्ट और संदेश तैयार करके लोगों को भेजने के लिए कुशल विशेषज्ञों और आईटी के जानकारों की खोज की जा रही है।
फेसबुक पर बढ़ी सक्रियता
जिले के हर व्यक्ति के बीच पहुंचना प्रत्याशियों के लिए संभव नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया ने इसे आसान बना दिया है। प्रत्याशियों ने इसके लिए फेसबुक को अहम जरिया बनाया है। प्रत्याशियों के एकाउंट और पेज तैयार किए गए हैं। जिन पर रोज नए-नए मैसेज पोस्ट किए जा रहे हैं।
नेताजी सीख रहे व्हाट्स एप चलाना
जिले में अधिकांश दावेदार और प्रत्याशी ऐसे हैं, जो नए जमाने के हिसाब से कदम ताल करना नहीं जानते। ऐसे में प्रचार के लिए वे भी व्हाट्स एप और फेसबुक चलाना सीख रहे हैं। एक नेता ने तो व्हाट्स एप और फेसबुक के लिए एक युवा साथी की नियुक्ति की है।
इनका कहना है
प्रत्याशियों ने आईटी के जानकारों के बारे जानकारी मांगी है। इसके साथ ही वार रूम के लिए कंप्यूटर वगैरह क्रय किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए तैयारी हो रही है।
मुकेश कुमार, माई इंफोसिस सेंटर
हर प्रत्याशी सोशल मीडिया के जरिए चुनाव मैदान में पकड़ बनाना चाहता है। इसके लिए कई प्रत्याशियों ने संपर्क किया है। कैंपेनिंग के लिए भी युवा जानकार तलाशे जा रहे हैं।
मोहित कुमार, विमर्श नेट पाइंट