एटा। सपा सरकार में जैथरा थाना 18 दिन बिना स्टाफ चलने के मामले की जांच तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने वाले पुलिस अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने एटा में पड़ताल की। टीम ने एसएसपी, सीओ कार्यालय में अभिलेख खंगाले। इस दौरान टीम विवेचक के बयान दर्ज करने पहुंची तो विवेचक नदारद मिले।
वर्ष 2016 में थाना जैथरा 18 दिन तक बिना स्टाफ चलने का मामला सामने आया था। मामले में आगरा से आई भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने जांच शुरू कर दी है। टीम ने सोमवार को एसएसपी कार्यालय, सीओ कार्यालय और अलीगंज कोतवाली पहुंचकर तमाम जानकारियां जुटाईं। इस दौरान टीम अलीगंज कोतवाली में तैनात विवेचक मदन मुरारी द्विवेदी के बयान लेने पहुंची, लेकिन एसएसआई मदन मुरारी नदारद मिले। इस पर उन्हें नोटिस दिया गया। वहीं टीम को सीओ कार्यालय से तमाम अभिलेख नहीं मिले।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के सीओ राजीव कुमार के नेतृत्व में आई तीन सदस्यीय टीम ने शिकायतकर्ता सुनील कुमार से भी बात की। बताया जाता है कि एसएसपी और सीओ आफिस में अभिलेख नहीं मिलने पर सीओ ने नाराजगी जताई। साथ ही टीम ने नदारद मिले कर्मचारियों को बुधवार को आगरा तलब किया है।
यह था पूरा मामला
हाईकोर्ट से की गई शिकायत में तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने थानाध्यक्ष कैलाश चंद्र दुबे को बचाने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट में 18 दिन तक बिना स्टाफ थाना चलने की पुष्टि की थी। मामले की शिकायत जैथरा के आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने सीएम योगी आदित्यनाथ से की। इसके साथ ही कई अन्य शिकायतों से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की भी शिकायत भी शामिल थी। मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश देते हुए जांच कर दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रमुख सचिव ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच की संस्तुति करतेे हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन को जांच सौंपी थी।
इन मामलों की हुई थी शिकायत
1.एसओ कैलाशचंद्र दुबे के खिलाफ पदभार ग्रहण करने से पहले मुकदमे की विवेचना शुरू करने और केस डायरी से पर्चा गायब करने की जांच में एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने क्लीन चिट दी। हालांकि मौजूदा एएसपी संजय कुमार ने जांच में थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई।
2 .वर्ष 2016 में डकैती के एक मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई के आदेश दिए। इसमें तत्कालीन सीओ धर्मसिंह ने एसओ कैलाश चंद्र दुबे को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। हालांकि एसओ ने 18 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज की। रिपोर्ट देरी से दर्ज होने के मामले की जांच में एएसपी ने जांच रिपोर्ट में थाने के पूरे स्टाफ को डेंगू, चिकुनगुनिया और बुखार की चपेट में आने की बात कहकर क्लीन चिट दे दी। जबकि 18 दिन बिना स्टाफ थाना चलने की सूचना शासन को नहीं दी गई।
3. एसओ ने एक घटना में शामिल ट्रैक्टर को बदलकर दूसरा ट्रैक्टर लगा दिया। साथ ही आरोपी की मदद की। मामले की जांच में भी एसओ को बचा लिया गया।
4. पाक्सो एक्ट में दर्ज एक मुकदमे की सूचना तीन दिन तक एसएसपी और कंट्रोल रूम को नहीं देने के मामले में एसओ के खिलाफ जांच की संस्तुति की गई। इसमें भी एसओ को बचा लिया गया।
5. पाक्सो एक्ट के एक अन्य मामले में एसओ कैलाशचंद्र दुबे ने तहरीर में नाबालिग और उम्र का खुलासा नहीं किया और एफआईआर न्यायालय को भेज दी। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निर्देश पर एसएसपी के जरिए सौंपी गई। जांच में एएसपी ने एसओ को क्लीन चिट देकर झूठी रिपोर्ट शासन को भेज दी।
आंकड़ों पर नजर
18 दिन बिना पुलिस के चला था थाना
2016 का है मामला
05 शिकायतों को लेकर चल रही है जांच
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम एटा पहुंचकर शिकायत संबंधी जांच पड़ताल की थी। टीम कुछ जांच संबंधि अभिलेख भी अपने साथ लेकर गई है।
संजय कुमार, एएसपी - एटा।