मैनपुरी। राशन घोटाले में कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूरी की जा रही है। एक ओर जहां पूर्ति विभाग अब तक अपनी जांच पूरी नहीं कर सका है तो वहीं, दूसरी ओर पुलिस भी किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। ऐसे में ये राशन घोटाला कैसे किया गया, इस पर भी पर्दा पड़ा हुआ है।
जिले में हुआ लाखों रुपये का राशन घोटाला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। न तो अब पूर्ति विभाग इसमें कोई रुचि ले रहा है और न ही पुलिस कोई खास कार्रवाई कर रही है। बताते चलें कि फर्जी आधार कार्डों से राशन का घोटाला किया गया था। मामला खुला तो इसमें 17 कोटेदारों के नाम सामने आए थे।
इसके बाद 16 कोटेदार, सात अज्ञात आधार कार्ड धारक दो विभाग के ही ऑपरेटर पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। दो माह बाद भी किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। अगर गिरफ्तारी हो जाती तो पूरा मामला खुलकर सामने आ जाता। सूत्रों के अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी से विभागीय अधिकारियों के नाम भी इस घोटाले में सामने आ सकते हैं। इसके कारण अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। पूर्ति विभाग ने भी अब तक बाकी 20 दुकानों की जांच रिपोर्ट नहीं दी है। आखिर इसमें इतनी देरी क्यों हुई ये किसी को नहीं पता।
आरोपियों ने एक या दो नहीं बल्कि 898 राशन कार्डों से घोटाला किया था, जिसमें करीब छह लाख रुपये का राशन हड़प लिया गया था। इन सभी राशन कार्ड धारकों के बयान भी अब तक दर्ज नहीं हुए हैं। इन लोगों के बयान इस पूरे मामले में अहम हैं। अगर ये लोग राशन लेने की बात स्वीकार कर लेते हैं तो पूरा मामला ही पलट जाएगा।
राशन घोटाला खुलने के बाद 17 राशन की दुकानें निलंबित कर दी गई हैं। इन दुकानों के पास की दुकान पर संबद्ध किया गया है। इससे राशन वितरण में समस्या आ रही है। लोगों का दबाव अधिक होने से राशन की दुकान पर भीड़ लगी रहती है। जहां लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।