मथुरा। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान स्वर्ण आभा से सुशोभित बंगले में चांदी के कमल पुष्प में जन्म लेंगे। यहां से वह मोर्छलासन में विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पहुंचेंगे। स्वर्ण मंडित रजत कामधेनु स्वरूपा गो प्रतिमा से ठाकुर जी का महाभिषेक किया जाएगा। उन्हें कमल की पंखुड़ियों से बनाई गई पोशाक धारण कराकर उनके सिर पर ब्रजरत्न का मुकुट सजाया जाएगा। श्रीकृष्ण
जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जन्मस्थान पर तीन सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। भगवान के प्राकट्य व कारागार के रूप में प्रसिद्ध गर्भगृह की सज्जा चित्त आकर्षक होगी।
जन्माभिषेक स्थल की दीवारों को प्राचीन भवनाकृति के स्वरूप में सोने का रूप देते हुए सजाया जाएगा। तीन सितंबर को प्रात: शहनाई व नगाड़ों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन होंगे। इसके बाद पंचामृत अभिषेक, पवित्र स्त्रोतों का पाठ व पुष्पार्चन होगा।
सुबह 10 बजे श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज व कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज के सानिध्य में लीलामंच पर पुष्पांजलि कार्यक्रम होगा। सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि जन्माभिषेक कार्यक्रम रात 11 बजे श्रीगणेश नवग्रह पूजन से शुरू होगा। रात 12 बजते ही प्राकट्य के साथ मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों व झांझ-मजीरों की करतल ध्वनि से गूंज उठेगा।
12:10 पर महाआरती के बाद केसर आदि द्रव्यों से लिपटे भगवान श्रीकृष्ण का चल विग्रह मोर्छलासन में विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पहुंचेगा। ठाकुर जी रेशम, जरी एवं रत्न से जड़ी कमलाकृति की पोशाक धारण करेंगे।
एक दिन पूर्व होंगे पोशाक व रजत कमल के दर्शन
जन्माष्टमी की पूर्व संध्या को शाम छह बजे केशवदेव मंदिर से संत एवं भक्त ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरे के मध्य भगवान श्रीराधाकृष्ण की दिव्य पोशाक अर्पित करने के लिए संकीर्तन करते हुए जाएंगे। शाम 6:30 बजे पोशाक, मुकुट, शृंगार, दिव्य मोर्छलासन, कामधेनु गाय की प्रतिकृति एवं रजत कमल के दर्शन होंगे।
स्वर्ण मंडित रजत कामधेनु स्वरूपा गो से होगा महाभिषेक
रात्रि 12:15 बजे से 12:30 बजे तक भगवान का प्रथम जन्माभिषेक स्वर्ण मंडित रजत से निर्मित कामधेनु स्वरूपा गोमाता करेंगी। मान्यता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास रहता है। गो विग्रह के पयोधरों से निकली दुग्ध धारा से कान्हा का अभिषेक होगा। इसमें दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों का भी उपयोग होगा।