खुले आसमान के नीचे टैंक्टर टाली पर लदा गेहूं।
एटा। जिले में गेहूं क्रय केन्द्रों पर 16 हजार किसानों से गेहूं खरीद की गई है। जबकि जिले में ढाई लाख किसान पंजीकृत हैं। ऐसे में बाकी किसानों का गेहूं आखिर कहां गया। गेहूं खरीद के आंकड़े यह तो साफ जाहिर कर रहे हैं कि दलालों और बिचौलियों के बीच गठजोड़ जरूर रहा है।
जिले में कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि किसानों की संख्या दो लाख 51 हजार 29 है। इन किसानों ने रबी की फसल के दौरान एक लाख 48 हजार हैक्टेयर जमीन पर गेहूं बोया था। क्षेत्रफल के हिसाब से जिले के किसानों ने पांच लाख 18 हजार मैट्रिक टन गेहूं की उपज ली। इतनी उपज को किसान अपने घरों में नहीं रखेगा। कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि हर वर्ष उत्पादन की आधी उपज किसानों को बेचनी पड़ती है। इससे साबित होता है कि जिले के ढाई लाख से अधिक किसानों ने 2.5 लाख मैट्रिक टन गेहूं को बाजार में बेचा है। अब सवाल उठता है कि अगर जिले के किसानों ने 2.5 लाख मैट्रिक टन गेहूं बेचा तो अन्य किसान आखिर कहां गए।
गेहूं क्रय केन्द्रों पर शुरू से लेकर आज तक वारदाना तो कभी धनराशि का रोना किसानों से रोया गया और दलालों व बिचौलियों से गठजोड़ कर गेहूं की खरीद की गई। किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर 2.34 लाख किसान कहां गए।
2.59 लाख जिले में हैं कुल किसान
5.98 लाख मैट्रिक टन गेहूं का हुआ है उत्पादन
64 हजार मैट्रिक टन गेहूं खरीदा का जिले को मिला लक्ष्य
16 हजार किसानों ने क्रय केन्द्र पर बेचा है अपना गेहूं
57 हजार मैट्रिक टन गेहूं की जिले में हुई है खरीद