एटा। इन दिनों के चढ़े तापमान से जिले में परंपरागत खेती शुरू नहीं हो पा रही। गर्मी के चलते किसान धान की पौध और मक्का की अगौती बुवाई नहीं कर रहे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इतने तापमान पर पौध रोपाई में कारगर नहीं रहेगी।
गर्मी का असर खेती पर दिखने लगा है। जून के दस दिन गुजरने के बाद भी जहां खेत सूने पड़े हैं। वहीं धान के अधिक लक्ष्य के बाद भी धान की पौध नहीं दिख रही। धान उत्पादक किसान रमेश यादव का कहना है कि इस तापमान में पौध जनरेशन के लिए कारगर नहीं होगी। इसके दोबारा लगाने पर इसके मरने की संभावना रहेगी।
श्याम सिंह, तालेवर सिंह आदि का कहना है कि मक्का की भी बुवाई इस तापमान में नहीं हो रही। सिंचाई से पौधे तो निकलेंगे लेकिन गर्मी के चलते किल्ले मर जाएंगे। किसान सुरेश का कहना है कि चार बीघा अगौती मक्का में हजारों का बीज बेकार चला गया। बीज विक्रेता नृपेंद्र शर्मा का कहना है कि अधिक गर्मी के चलते किसान बीज और दवाएं नहीं खरीद रहे हैं। इन्हीं दिनों में होने वाली धान की पौध अभी लोग नहीं लगा रहे। हर किसी को मानसून का इंतजार है।
इस तापमान में फसल व पौध को पानी की अधिक आवश्यकता रहेगी। नहर बंबों के किनारे लोग पौध कर सकते हैं लेकिन निजी साधनों के सहारे संभव नहीं है।
- सुधीर तोमर, कृषि अधिकारी
पछुआ हवाओं से पारे में उछाल: फोटो
एटा। पछुआ हवाओं से तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच गया है। गर्मी बढ़ने से लोग परेशान हैं। दोपहर होते-होते सूरज की तपिश से आसमान से आग बरसने लगी। तेज धूप और उमस के कारण सड़कों पर निकलने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दोपहर बाद गर्म हवाओं ने परेशानियां बढ़ा दी। गर्मी बढ़ने से हीट स्ट्रोक और फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ रहा है। पेट संबंधी बीमारियों के अलावा डायरिया का प्रकोप फैलता है।