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वादे हैं वादों का क्या...

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वादे हैं वादों का क्या... - फोटो : अमर उजाला
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एटा। पांच वर्ष में 50 साल के बराबर विकास का दावा, मगर पांच महीने में सब कुछ जीरो। घोषणाओं की लंबी फेहरिस्त से जनता को प्रलोभन दिए गए, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं। उनको वोट मिल गए, कुर्सी मिल गई, अब जनता विकास को तरसती है, तो तरसती रहे। पांच महीने मेें पालिकाध्यक्ष ने एक भी ऐसा काम शुरू नहीं किया जिससे जनता को लगे कि उनका जनप्रतिनिधि कुछ काम कर रहा है। यही कारण है कि जनता में आक्रोश नजर आने लगा है। शहरवासी गर्मी में भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है, लेकिन पालिका और प्रतिनिधियों को कोई सरोकार नहीं। हर घर को 20 लीटर आरओ का पानी देने का वादा भी अधूरा है। पढ़िए रिपोर्ट....


चुनाव के दौरान जारी हुआ था शपथ पत्र
दरअसल, पालिकाध्यक्ष मीरा गांधी ने नगर निकाय चुनाव के दौरान दिसंबर 2017 में विकास कार्य को लेकर शपथ पत्र जारी किया था। इसमें 13 अलग-अलग विकास कार्य कराने के लिए योजनाएं रखी गईं, लेकिन अब तक एक भी अमल में नहीं लाई जा सकी।
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बोर्ड में ही नहीं बन रही सहमति
पालिका के पांच महीने के कार्यकाल को देखा जाए, तो यहां बोर्ड ही एक-दूसरे से सहमत नहीं है। दो गुटों में बंटे बोर्ड को संभालने में पालिकाध्यक्ष पूरी तरह से नाकाम है। आलम यह है कि दो बार हुई बोर्ड बैठक भी बमुश्किल संपन्न हुई है।


लोग धरने को बैठने पर मजबूर
पालिका की अनदेखी का आलम यह है कि लोगों को समस्याओं को दूर कराने के लिए धरने का सहारा लेना पड़ रहा है। शहर गंदगी, अतिक्रमण, पेयजल संकट से जूझ रहा है, लेकिन पालिका प्रतिनिधियों को इससे कोई सरोकार नहीं है। कटरा मोहल्ला में कूड़ा हटवाने को हुआ धरना इसकी बानगी है।
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कौन सा वादा कितना पूरा
-घर बैठे महिलाओं को रोज 300 से 500 रुपये का काम दिलवाना- कोई अमल नहीं।
-हर घर में प्रतिदिन 20 लीटर आरओ फिल्टर पेयजल भिजवाना- कोई अमल नहीं।
-प्रत्येक गरीब के घर राशन के सामान को पालिका के साधनों से भिजवाना- कोई कवायद नहीं।
-आकस्मिक आपदा में प्रत्येक गरीब को 10 मिनट में 10 हजार की सहायता- पूरी तरह शून्य।
-कामगार और बेरोजगारों को पालिका निधि से दो लाख तक बिना ब्याज गारंटी के काम शुरू कराना- अमल में नहीं।
-25 वार्डों मेें जन समस्या समाधान केंद्र और टोल फ्री नंबर जारी करना- कोई अमल नहीं।
-प्रत्येक वार्ड के लिए समान बजट और उसे जनता, अधिकारियों से पास कराना- कुछ भी नहीं हुआ।
-विकास कार्य का लेखा-जोखा और आय व्यय प्रत्येक वार्ड के सूचना पट पर लिखवाना- न तो विकास कार्य हुए और न सूचना पट लगे।
-सोलर स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सिस्टम और बिजली के तार अंडरग्राउंड कराना- घोषणा महज दिखावा।
-पालिका का अस्पताल स्थापित कराना- कोई कवायद नहीं।
-प्रत्येक वार्ड में सफाई कर्मचारी की तैनाती- तैनाती हुई, मगर काम नहीं।
-वृद्धाश्रम की स्थापना कराना- कोई कवायद नहीं।
-नगर वासियों का गृहकर जलकर निजी स्रोतों से जमा कराना- कोई अमल नहीं।


पालिकाध्यक्ष का घोषणा पत्र पूरी तरह से झूठा था। अब तक कोई काम नहीं हुआ। शहर विकास को तरस रहा है। कोई भी घोषणा अमल मेें नहीं लाई गई।
शिव कुमार, कटरा मोहल्ला

चुनाव के दौरान नेता इसी तरह से वादे करते हैं, लेकिन बाद में कुछ नहीं होता। कुर्सी प्रेम के चलते पालिकाध्यक्ष सारे वादों को भूल गई हैं। इसके परिणाम सामने आएंगे।
मोहित, विजय नगर
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