जिले में हर साल मलेरिया से काफी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है, लेकिन जिले में इसकी रोकथाम के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जाती। जिले में मलेरिया विभाग के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। निकायों ने अभी तक दवा का छिड़काव शुरू नहीं किया है।
कासगंज मलेरिया के मामले में बेहद संवेदनशील है। जिले को सृजित हुए 10 वर्ष हो चुके हैं। शासन से मलेरिया विभाग का तो गठन कर दिया, लेकिन इस विभाग के संचालन के लिए आवश्यक पदों को आज तक नहीं भरा गया। मात्र मलेरिया अधिकारी को ही तैनात किया गया है। मलेरिया की जांच के लिए अलग से कोई प्रयोगशाला नहीं बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग की लैब पर ही मलेरिया की जांच होती है। सीनियर लैब टेक्निशियन की तैनाती यहां पर आज तक नहीं हो सकी हैं। जिससे लैब टेक्निशियन की रिपोर्ट की सत्यता की जांच तक नहीं हो पाती। विभाग के पास अपना भवन भी नहीं हैं। सीएमओ कार्यालय में ही एक कमरे में मलेरिया विभाग चल रहा है। जिले के हिसाब से अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, वैक्टर बोन, असिस्टेंट मलेरिया अधिकारी के एक एक पद, मलेरिया निरीक्षक के दो पद, स्प्रे मैन के 41 पद होने चाहिए, लेकिन इनमे से कोई भी पद सृजित नहीं हुआ है। गर्मी बढ़ने के साथ ही मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है, लेकिन निकायों ने अभी तक दवा छिड़काव के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
मलेरिया के लक्षण
ठंड से तेज बुखार आना
कंपकंपी आना व दांत किटकिटाना
शरीर से बहुत पसीना आना
लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी आना
मलेरिया से बचाव
अपने आसपास पानी इकट्ठा न होने दें
जमा पानी में केरोसिन, डीजल की बूंदे डाल दें
पानी के बर्तन को ढक कर रखें
मच्छर भगाने वाली धूपबत्ती, क्रीम, लोशन का प्रयोग करें
शरीर के खुले हिस्से पर नीम या सरसों का तेल लगाएं
मलेरिया का उपचार
मरीज को अस्पताल ले जाकर दिखाएं
पीड़ित के रक्त की जांच कराएं
मलेरिया होने पर नियमित दवा का सेवन करें
खाली पेट दवा का सेवन न करें
गर्भवती को मलेरिया से बचाएं उसमें खून की कमी हो सकती है
शासन से उनके अलावा अन्य पद सृजित नहीं किए हैं। विभाग के पास दवा के पर्याप्त इंतजाम है। स्थानीय निकायों के माध्यम से दवा का छिड़काव कराया जाता है। 1 जून से दवा का छिड़काव शुरू हो जाएगा। - राजकुमार सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी