कोसीकलां (मथुरा)। घोड़ों में होने वाली खतरनाक बीमारी ग्लैंडर्स का वायरस कोसीकलां पहुंचने के बाद इससे पीड़ित घोड़ी रानी और गधे को चिकित्सकों ने इंजेक्शन देकर मौत दी। शनिवार को करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद दोनों पशुओं को दफना दिया गया। मामला बेहद गोपनीय होने के बावजूद घटनास्थल पर तमाम लोग पहुंच गए। पुलिस ने भी मौके पर निगाह बनाए रखी।
नत्थी कालोनी निवासी सलाउद्दीन की घोड़ी रानी और खेड़ा ऊपर निवासी लखन के गधे को लाइलाज बीमारी ग्लैंडर्स हो गई थी। इस संक्रामक बीमारी से बचाव का मौत ही एक मात्र तरीका था। उधर, शनिवार को सलाउद्दीन घोड़ी रानी को लेकर और लखन अपने गधे को लेकर मौके पर पहुंचे। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एके सिंह और डा. आशीष शर्मा के नेतृत्व में पशुचिकित्सकों की टीम भी निर्धारित स्थान पर पहुंची। करीब साढ़े दस बजे पशुओं को एनेस्थीसिया देकर बेहोश करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इससे पूर्व ब्रुक इंडिया निर्फाद एनजीओ के वीएसीएम रामखिलावन पाल एवं चिकित्सकों ने संक्रमण से बचाने वाले विशेष प्रकार के कपड़े पहने और पशुपालकों को भी दस्ताने एवं मास्क लगाए। टीम ने दोनों पशुओं का सीरम सैंपल भी एकत्रित किया। टीम ने दोनों पशुओं को बेहोश करने के लिए थायोपेंटीन सोडियम इंजेक्शन दिया। इससे दोनों पशु बेहोश होकर गिर पड़े। टीम ने पशुओं को दस फुट गहरे गड्ढे में रखा। इसके बाद उनके दिल की धड़कन को रोकने वाला मैग्नीशियम सल्फेट का सेचुरेटेड घोल चढ़ाया गया। धीरे-धीरे दोनों पशुओं की हृदय गति थम गई। उनकी मौत की पुष्टि हो जाने पर गड्ढे को भर दिया गया।
घोड़ी से लिपट कर रोया मालिक
कोसीकलां। सफेद रंग की घोड़ी रानी को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वह बीमार है। वह काफी सुंदर लग रही थी। वह जैसे ही गड्ढे की तरफ बढ़ी तो उसके मालिक सलाउद्दीन फूट-फूट कर रो पड़े। उसे प्यार-दुलार किया। उन्होंने रो-रोकर कहा कि वह चार माह पूर्व बीमार थी। अब तो खाना-दाना भी खा रही थी। अच्छी हो गई थी। एक बार की जांच में ही क्या हो गया। हर बीमारी का इलाज होता है। इस बीमारी का भी कोई इलाज खोजे लेते...।