लापरवाही: छात्राओं पर भारी पड़ा निवाला
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एटा। दवाओं की किल्लत से जूझ रहे जिला अस्पताल की पोल शुक्रवार को खुलती नजर आई। आलम यह रहा कि इमरजेंसी में छात्राओं को जीवनरक्षक दवाएं तक नसीब नहीं हो सकीं। वहीं डीएम के पहुंचने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल वाउचर बनाकर बाहर की दुकानों से दवा खरीदीं।
जिला अस्पताल में दवाओं को लेकर किल्लत बनी हुई है। भुगतान नहीं होने से दवा कंपनियों ने आपूर्ति बंद कर दी है। इसका सामना शुक्रवार को कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राओं को भी करना पड़ा। आलम यह रहा कि छात्राओं का अस्पताल पहुंचना शुरू हुआ, तो अस्पताल प्रशासन छोटी मोटी दवा देकर काम चलाता रहा। इस दौरान एक भी छात्रा को जीवन रक्षक दवा नहीं दी गई। जैसे ही डीएम अमित किशोर जिला अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने उपचार में शिथिलता देख डाक्टरों को फटकार लगाई। इसके बाद आनन फानन में अस्पताल प्रशासन ने वाउचर बनाकर दवाओं की खरीद शुरू कर दी। अस्पताल के कर्मचारी बाहर बने मेडिकल स्टोरों पर पहुंचकर दवा लाने और बंदोबस्त करने में जुटे रहे। उधर, अवागढ़ पीएचसी में छात्राओं को भर्ती करने के लिए बेड का टोटा पड़ गया। इसके चलते एक-एक बेड पर पांच-पांच छात्राओं को लिटाया गया। इसे लेकर लोगों ने आक्रोश जताया।
कबाड़े से निकले स्टैंड
जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती कराई छात्राओं के बेड के पास बोतल टांगने के लिए स्टैंड की व्यवस्था ही नदारद थी। जब छात्राओं का वार्ड में पहुंचना शुरू हुआ तो अस्पताल प्रशासन ने कबाड़े में पड़े पुराने स्टैंड निकालकर व्यवस्था की।
मामले की मजिस्ट्रेट जांच एसडीएम जलेसर विजय कुमार को सौंपी गई है, जिन्होंने आवासीय विद्यालय से खाद्य विभाग के अधिकारियों के साथ सैंपल भर लिए है। सभी छात्राएं खतरे से बाहर है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अमित किशोर, जिलाधिकारी