आगरा। वोल्वो, स्कैनिया और शताब्दी बसें परिवहन निगम के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही हैं। कई रूटों पर सवारियां नहीं मिलने के बाद भी इनका संचालन किया जा रहा है। इन गाड़ियों में दो चालकों की ड्यूटी के कारण भी निगम पर बोझ बढ़ गया है।
खराब मौसम में यात्री नहीं मिलने के कारण कई दफा इन्हें निरस्त भी करना पड़ता है। परिवहन निगम ने यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर वोल्वो, स्कैनिया और शताब्दी जैसी बसों का संचालन शुरू किया है, इनमें से ज्यादातर बसें अनुबंधित हैं।
इनके अनुबंध की शर्तों में इन्हें प्रति किलोमीटर का भुगतान करना होता है। निगम इन बसों के भुगतान में लोड फैक्टर कम रहने पर भी धनराशि की कटौती नहीं कर सकता है। इसके अलावा कई लंबे रूटों पर इन बसों में सवारियां नहीं मिल पाती हैं।
रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि इस सीजन में अभी तक कई बार वोल्वो और स्कैनिया बसों को निरस्त किया जा चुका है। इन बसों को निरस्त करने की वजह पर्याप्त यात्रियों का नहीं मिलना है। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के नेताओं की मानें तो ये बसें भारी घाटे का सौदा बन चुकी हैं।
इसके बाद भी इनका संचालन किया जा रहा है। इन बसों में दो चालकों की ड्यूटी लगाई जाती है। इससे भी निगम की सेवाओं पर असर पड़ता है। दो चालकों को वेतन तो निगम की ओर से ही दिया जाता है।