एटा। वन्य जीवों के अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत वन्य विहार एवं संरक्षित क्षेत्रों की दस किलोमीटर की परिधि में रहने वाले लोगों को शस्त्र लाइसेंस पाने के लिए वन विभाग अधिकारियों की संस्तुति अनिवार्य होगी।
संरक्षण अधिनियम के अनुसार पक्षी विहार और वन्य संरक्षित क्षेत्रों के निकटवर्ती लोगों को शस्त्र लाइसेंस अब आसानी से नहीं मिल सकेगा। अब उन्हें वन्य अधिकारी की संस्तुति के बाद ही लाइसेंस स्वीकृत होगा। इसके लिए विभाग ने शुल्क भी निर्धारित कर दिया है।
अधिनियम के अनुसार लाइसेंस पंजीकरण शुल्क 2500 रुपए वहीं 1500 रुपए का वार्षिक नवीनीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। एसके उपाध्याय प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव अभिरक्षक उत्तर प्रदेश शासन ने शासनादेश जारी कर डीएफओ को अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस आदेश के बाद पटना पक्षी विहार के दस किलोमीटर में निवास करने वाले शस्त्र धारकों की औपचारिकताएं बढ़ गई हैं। डीएफओ अखिलेश कश्यप ने कहा कि आदेश का कड़ाई से पालन होगा।