बच्चों की हत्या के बाद मौके पर लगी भीड़।
एटा। कहते हैं बचपन मासूम, नासमझ और नटखट होता है। वे रोज की तरह घर के बाहर खेल रहे थे। शान ने बहन गुलफशा से मिट्टी का घर बनाने के लिए कहा था। गुलफशा भाई की मदद से घरौंदा तैयार कर रही थी, लेकिन उनको क्या पता था कि वे जिस घरौंदे को बनाकर खुश हो रहे हैं, वह ज्यादा देर तक न टिकेगी। सुरा का सुरूर मासूमों के काल बन जाएगा। उन्हें नहीं पता कि पानी देने से मना करना उनके बचपन की सबसे बड़ी भूल बन जाएगा। सोमवार को गांव देवतरा में दो मासूमों की मौत के बाद हर जुबां यहीं बातें कर रही थी। परिजन तो लाडलों को खोने के गम में बेसुध थे। मगर गांव के लोग छोटे सिंह की हरकत पर आक्रोश जता रहे थे। घर में कोहराम मचा हुआ था।
बताया जाता है कि आरोपी छोटे सिंह गांव के पड़ोस में रहता था। सोमवार को वह शराब के नशे में आया और बच्चों से पानी मांगने लगा। बच्चों ने खेल के चक्कर में इदरीश की बच्चों ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। शराब के नशे में योगेंद्र उर्फ छोटे ने आव देखा, न ताव और मासूमों में गोली दाग दी। गोली लगने के बाद दोनों मासूम वहीं गिर पड़े। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन बाहर दौड़े तो बच्चों की लाश देख होश खो बैठे। चारों ओर चीख पुकार और कोहराम मच गया। हर आवाज में मासूमों की मौत का आक्रोश था। मगर आक्रोश से मासूमों की जान तो वापस आ नहीं सकता। पिता इदरीश मजदूरी करने गए थे। सूचना पर पहुंचे, तो कलेजे के टुकड़ों की लाशें देख बेसुध होकर गिर पड़े। ग्रामीणों ने संभाला, तो बोले मेरे लाडलों का क्या दोष था? मां का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव में घटना के बाद मातम का माहौल है।
शुक्र है घर पर नहीं था सोहेल
इदरीश के तीन बच्चे सोहेल, गुलफ गुलफशा और शान मोहम्मद हैं। घटना के वक्त सोहेल घर पर नहीं था। पिता इदरीश ने बताया कि सोहेल गांव में दूसरी ओर गया था। अगर वह होता, तो दरिंदा उसे भी मौत के घाट उतार देता।
गुलफशा बनना चाहती थी डाक्टर
पिता इदरीश ने बताया कि गुलफशा गांव के स्कूल में कक्षा दो की छात्रा थी। वह डाक्टर बनना चाहती थी। पिता का कहना था कि आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है, लेकिन बिटियों के भविष्य को लेकर काफी सपने संजोए थे, लेकिन सब अरमान दफन हो गए।