तीन घंटे दहशत में रहे शहर के लोग
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एटा। उनके समझदार होने की भूल ने प्रशासन की शुक्रवार को किरकरी करा दी। धीरे-धीरे सुलग रही आक्रोश की आग प्रशासन पर ही शोला बनकर गिरी। वहीं शिक्षामित्रों के आक्रोश और प्रदर्शन को लेकर लोगों ने भी नाराजगी जाहिर की।
दरअसल, जब से सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन को रद्द करके शिक्षामित्रों को बाहर का रास्ता दिखाया है, तब से लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। आलम यह है कि आए दिन राजमार्ग रोकना, रेल रोकना, अर्धनग्न प्रदर्शन कार्यक्रमों से जनता की परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन को भी शुक्रवार को हुए बवाल की उम्मीद नहीं थी। अधिकारियों ने सोचा था कि शिक्षामित्र ज्ञापन देकर हर बार की तरह चले जाएंगे। लेकिन शिक्षामित्रों का आक्रोश धीमे धीमे सुलगता रहा जो पथराव और हिंसा में बदल गया।
हद तो तब हुई जब पुलिस के खदेड़े जाने के बाद शिक्षामित्र गए नहीं। पुलिस को भी सख्त एक्शन लेते हुए कार्रवाई करनी पड़ी। अधिकारियों का कहना था कि शिक्षामित्रों से ऐसी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। बताया जाता हैै कि शिक्षामित्रों ने गुरुवार को भी सीओ सिटी पर चप्पल फेंकने का प्रयास किया था। मगर फिर भी प्रशासन आक्रोश को भांप नहीं सका।
उधर, लगातार विरोध-प्रदर्शन और बवाल को लेकर लोगों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि आखिर शिक्षामित्र चाहते क्या हैं? अगर वे नौकरी में बने रहना चाहते हैं, तो योग्यता हासिल करें। सरकार तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप ही कर रही है। लोगों का कहना यह भी है कि इस तरह के प्रदर्शन से शिक्षक की गरिमा बिगड़ रही है। प्रदर्शन और गुस्से के अन्य भी तरीके हो सकते हैं।
इनका कहना है
शिक्षामित्रों ने आक्रोशित होकर पथराव किया है। इसमें पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। रोकने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। स्थिति पर काबू पा लिया गया है। मामले में शिक्षामित्रोें की गिरफ्तारी की गई है। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अमित किशोर, डीएम एटा