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हकीकत से कोसों दूर है सब पढे़ं सब बढे़ं का नारा

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Parishadiaya school
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कासगंज।
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शनिवार को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। बच्चों की शिक्षा के लिए शासन ने सब पढे़ं सब बढे़ं का नारा भी दिया है, लेकिन यह नारा हकीकत से कोसों दूर है। आज भी तमाम परिवार ऐसे हैं जिनमें बच्चों की शिक्षा से अधिक आवश्यकता पेट की भूख मिटाने की रहती है। इससे तमाम नौनिहाल शिक्षा के मंदिर के दर्शन नहीं कर पाते।
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जनपद में 14,36,719 आबादी निवास करती है। शासन का पूरा जोर शिक्षा पर है। प्रतिवर्ष शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च भी हो रहा है, लेकिन इस धन के सार्थक परिणाम सामने नहीं आ पा रहे। आज भी काफी संख्या में परिवार ऐसे हैं जिनके सामने रोजी रोटी का संकट है। बच्चे का बचपन होटल, ढाबों, चाय की दुकानों पर बीत जाता है। इतना ही नहीं पेट की खातिर तमाम बच्चे खतरनाक काम भी करते हैं। श्रम विभाग बाल श्रम रोकने के नाम पर अभियान के नाम पर खानापूर्ति भी करता है लेकिन व्यवस्था जस के तस बनी हुई है। अगस्त माह से अब तक प्रशासन एवं श्रम विभाग द्वारा जो भी अभियान चलाया गया उसमें बाल श्रम करते हुए बच्चे पाए गए। अगस्त माह से अब तक विभाग ऐसे डेढ़ दर्जन बच्चों को काम से हटाकर उनके परिवारीजनों को सुपुर्द कर चुका है। जब इन बच्चों से बातचीत की गई तो उन्होंने अपना दर्द भी बया किया। बच्चों ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, जिसके चलते उन्हें काम करना पड़ता है। वर्ष 2011 की आबादी के आधार पर ही 62.63 प्रतिशत आबादी ही साक्षर की श्रेणी में है।
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जनपद में अशिक्षित बाशिंदों की स्थिति
कुल अशिक्षित आबादी अशिक्षित पुरुष अशिक्षित महिलाएं
जनपद 711869 311362 400507
ग्रामीण क्षेत्र 582984 251994 330990
शहरी क्षेत्र 128885 59368 69517
बाल श्रम रोकने के लिए श्रम विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। अभियान के दौरान जो भी बच्चे श्रम करते हुए मिलते हैं उनको परिवार को सुपुर्द करने के बाद शिक्षा से जोड़ने के लिए कार्य किया जाता है।
धर्म सिंह श्रम प्रवर्तन अधिकारी
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